
एसडीएम के औचक निरीक्षण पर नपाध्यक्ष के सवाल के बाद बढ़ा प्रशासनिक दबाव, तीन सदस्यीय कमेटी को सात दिन में अभिलेखीय व स्थलीय जांच का आदेश
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। नगर पालिका परिषद कुशीनगर में विकास कार्यों और विद्युत सामग्री से जुड़े खर्च को लेकर उठ रहे सवाल अब प्रशासनिक जांच की चौखट तक पहुंच चुके हैं। सड़क, नाली, इंटरलॉकिंग, सौंदर्यीकरण और अन्य निर्माण कार्यों के साथ-साथ सामग्री खरीद एवं भुगतान प्रक्रिया को लेकर सामने आई शिकायतों के बाद जिलाधिकारी महेन्द्र सिंह तंवर ने 25 अगस्त 2026 को 11 बिंदुओं पर जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। कमेटी को केवल कागजी अभिलेख खंगालने तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि अभिलेखीय और स्थलीय दोनों स्तर पर जांच कर सात दिन के भीतर संयुक्त आख्या और स्पष्ट संस्तुति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
मामले में दिलचस्प मोड़ तब आया, जब नगर पालिका कार्यालय में उपजिलाधिकारी कसया विवेक कुमार मिश्र के औचक निरीक्षण के बाद नगर पालिका अध्यक्ष किरन जायसवाल की ओर से निरीक्षण की अधिकारिता और प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पत्र जारी किया गया। निरीक्षण को लेकर उठे सवालों के बीच अब जिलाधिकारी ने पालिका के निर्माण कार्यों और विद्युत सामग्री से संबंधित शिकायतों पर बाकायदा जांच बैठा दी है। इससे विवाद का केंद्र निरीक्षण के अधिकार से आगे बढ़कर नगर पालिका के कामकाज, अभिलेखों और धरातल पर हुए विकास कार्यों की वास्तविकता तक पहुंच गया है।
11 बिंदुओं पर होगी जांच, फाइल और जमीन का होगा मिलान
शिकायतकर्ता राहुल सिंह की ओर से नगर पालिका परिषद कुशीनगर में कराए जा रहे निर्माण कार्यों तथा विद्युत सामग्री से संबंधित कार्यों में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे। इन्हीं शिकायतों से जुड़े 11 बिंदुओं को जांच के दायरे में लिया गया है। प्रशासनिक आदेश के बाद अब संबंधित फाइलें, स्वीकृतियां, कार्यादेश, माप पुस्तिकाएं, भुगतान से जुड़े अभिलेख, सामग्री खरीद और अन्य संबंधित दस्तावेज जांच के केंद्र में रहेंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच केवल ‘कागज क्या कहता है’ तक सीमित नहीं होगी। मौके पर जाकर यह भी देखा जाएगा कि जिन विकास कार्यों पर सरकारी धन खर्च होने का दावा किया गया है, वे वास्तव में हुए भी हैं या नहीं, उनकी गुणवत्ता और स्थिति क्या है तथा अभिलेखों में दर्ज विवरण धरातल की वास्तविकता से कितना मेल खाता है।
तीन सदस्यीय कमेटी पर टिकी निगाहें
जिलाधिकारी के आदेश के अनुसार जांच कमेटी की अध्यक्षता एसडीएम कसया विवेक कुमार मिश्र करेंगे। सहायक अभियंता विद्युत वितरण खंड कुशीनगर तथा सहायक अभियंता लोक निर्माण विभाग, प्रांतीय खंड, कुशीनगर मुकेश वर्मा को सदस्य नामित किया गया है। कमेटी को सात दिन में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के दौरान किन अभिलेखों की पड़ताल होती है, कितने कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया जाता है और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर कमेटी की अंतिम संस्तुति क्या होती है।
औचक निरीक्षण से शुरू हुआ विवाद, जांच तक पहुंचा मामला
पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो पहले नगर पालिका की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों को लेकर शिकायतें सामने आईं। मीडिया रिपोर्टों में भी इन सवालों को प्रमुखता से उठाया गया। इसके बाद एसडीएम का औचक निरीक्षण हुआ। निरीक्षण के बाद नगर पालिका अध्यक्ष की ओर से एसडीएम के अधिकार और निरीक्षण प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए। लेकिन इसी बीच जिलाधिकारी ने 11 बिंदुओं की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी।
यानी अब असली परीक्षा फाइलों की है। यदि अभिलेख और धरातल एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं तो नगर पालिका के विकास कार्यों को लेकर उठ रहे सवालों को मजबूती से जवाब मिलेगा। वहीं यदि दस्तावेजों और मौके की स्थिति में अंतर सामने आता है तो जांच रिपोर्ट कई नए सवालों का रास्ता खोल सकती है।
सात दिन बाद क्या सामने आएगा?
सरकारी धन जनता के पैसे से आता है और विकास कार्यों में उसके इस्तेमाल का हिसाब भी सार्वजनिक जवाबदेही के दायरे में आता है। ऐसे में जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि एसडीएम को निरीक्षण का अधिकार था या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि नगर पालिका में विकास और खरीद के नाम पर हुए कार्यों का वास्तविक हिसाब क्या है?
सात दिन की समय-सीमा में आने वाली रिपोर्ट तय करेगी कि शिकायतों में कितनी सच्चाई है, अभिलेख कितने पारदर्शी हैं और धरातल पर विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है। फिलहाल डीएम के आदेश ने नगर पालिका की उन फाइलों पर प्रशासन की सीधी नजर डाल दी है, जिनमें विकास कार्यों और खर्च का पूरा लेखा-जोखा दर्ज है।अब जनता की निगाह जांच रिपोर्ट पर है—फाइलों से विकास की तस्वीर निकलेगी या सवालों के पीछे छिपी कोई नई कहानी सामने आएगी?
नोट—अगले अंक में पढ़िए: अध्यक्ष जी! राकेश जायसवाल किस अधिनियम और शासनादेश के तहत ईओ के साथ निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर रहे हैं? क्या इस मामले में भी प्रशासन की ओर से कोई नोटिस जारी होगा?
