
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त—वह दिन जब देश का हर कोना तिरंगे की शान में रंग जाता है और राष्ट्रगान की गूंज सुनाई देती है। लेकिन दुदही क्षेत्र स्थित जाईबुन निशा गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल को लेकर इसी राष्ट्रीय पर्व पर ऐसे सवाल खड़े हुए हैं, जिनका जवाब अब संबंधित विभाग को देना होगा।
आरोप है कि 15 अगस्त के दिन संस्था परिसर में ध्वजारोहण नहीं किया गया। सवाल यह है कि जब देश आजादी का अमृत उत्सव मनाने से आगे बढ़कर स्वतंत्रता दिवस को राष्ट्रीय गौरव के रूप में मना रहा था, तब एक शैक्षणिक संस्था में तिरंगा क्यों नहीं फहराया गया? क्या प्रबंधन को राष्ट्रीय पर्व की गरिमा का एहसास नहीं था, या फिर संस्था के संचालन को लेकर कोई ऐसी पेचीदगी है, जिसे सामने आने से बचाया जा रहा है?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। शिकायतकर्ता का दावा है कि संस्था से जुड़े कुछ बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से अब भी संचालित की जा रही है। वहीं संस्था के संचालन और अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल संस्था के कथित निरस्तीकरण आवेदन को लेकर है। सूत्रों के अनुसार यदि संस्था के निरस्तीकरण के लिए आवेदन दिया गया था, तो अप्रैल में ही उस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आवेदन आखिर कब दिया गया? विभागीय स्तर पर उसकी फाइल कहां पहुंची? क्या कोई आदेश जारी हुआ या मामला सिर्फ कागजों और दफ्तरों की फाइलों में घूमता रहा?
और यदि संस्था वास्तव में निरस्तीकरण की प्रक्रिया में है, तो फिर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई किस आधार पर संचालित हो रही है? यही विरोधाभास अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है।
मुख्यमंत्री की सख्ती और शासन की स्पष्ट व्यवस्थाओं के बीच 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व पर कथित रूप से तिरंगा न फहराए जाने का मामला सामने आना निश्चित रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल सिर्फ झंडारोहण का नहीं, बल्कि संस्था के वास्तविक संचालन, विभागीय निगरानी और रिकॉर्ड की पारदर्शिता का भी है।
अब निगाहें अल्पसंख्यक विभाग की जांच पर टिकी हैं। विभाग कब जांच करता है और जांच में क्या सच्चाई सामने आती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
सवाल सीधा है—तिरंगा क्यों नहीं फहरा और अगर संस्था पर कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है, तो ऑनलाइन पढ़ाई किस आधार पर? जवाब विभाग को देना होगा।
