

कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। भगवान श्रीराम और भगवान हनुमान को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब कुशीनगर में भी गरमा गया है। विशुनपुरा थाना क्षेत्र में रविवार को हिंदू समाज से जुड़े बड़ी संख्या में लोग एकजुट होकर थाने पहुंचे और थाना प्रभारी को लिखित प्रार्थना पत्र सौंपते हुए कथित टिप्पणी करने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। लोगों का कहना था कि बार-बार धार्मिक आस्थाओं पर विवादित बयान देकर समाज की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
ज्ञापन में कहा गया कि भारत केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, परंपराओं और आस्था का राष्ट्र है। भगवान श्रीराम और भगवान हनुमान करोड़ों लोगों के आराध्य हैं। ऐसे में उनके विरुद्ध कथित अभद्र टिप्पणी केवल एक बयान नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं पर सीधा प्रहार है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ किसी धर्म, देवी-देवता या धार्मिक प्रतीकों का सार्वजनिक अपमान करने का अधिकार नहीं हो सकता।
आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार हिंदू देवी-देवताओं और सनातन परंपराओं को लेकर विवादित बयान देते रहे हैं। उनका कहना था कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो इससे समाज में वैमनस्य बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था के लिए भी चुनौती खड़ी हो सकती है। लोगों ने प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं के साथ बार-बार खिलवाड़ करने वालों पर कानून का डंडा समान रूप से चलना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार किसी दूसरे की आस्था को ठेस पहुंचाने की छूट नहीं देता। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी धर्म विशेष की भावनाओं से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके।
ज्ञापन पर राजन ब्याहुत, डॉ. राजन सिंह, अर्पित राय, कृष्ण मदन चौहान, दुधनाथ पाल, सूरज पाल, विवेक कुशवाहा , अतुल पटेल आनन्द कुशवाहा ,राजन कुशवाहा, दुर्गेश कुशवाहा, दीपक सिंह,पंकज कुशवाहा,सहित क्षेत्र के अनेक लोगों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। इससे साफ है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर व्यापक चर्चा और नाराजगी का विषय बन चुका है।
इस दौरान मौजूद लोगों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब भी चुनावी मौसम या राजनीतिक सुर्खियों की जरूरत पड़ती है, तब कुछ नेताओं को करोड़ों लोगों की आस्था ही सबसे आसान निशाना दिखाई देने लगती है। उनका कहना था कि राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक प्रतीकों पर कथित विवादित बयान देना समाज के हित में नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द को कमजोर करने वाला कदम है। उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि कानून सबके लिए समान है, इसलिए कार्रवाई भी बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए।
फिलहाल विशुनपुरा पुलिस ने प्रार्थना पत्र प्राप्त कर मामले को संज्ञान में लेने की बात कही है। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की विधिक जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता के साथ कदम उठाता है।
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