
कुशीनगर | विलेज फास्ट टाइम्स से विशेष संवाददाता
पडरौना विद्युत उपकेंद्र में आउटसोर्सिंग के जरिए कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर तैनात अमित सिंह इन दिनों अपनी कथित आर्थिक हैसियत और विभागीय भूमिका को लेकर चर्चा में हैं। विभागीय सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि करीब दस हजार रुपये मासिक मानदेय पाने वाले अमित सिंह के पास लाखों रुपये कीमत की लग्जरी कार है और उसके लिए लगभग 20 हजार रुपये मासिक वेतन पर निजी ड्राइवर रखा गया है। इसके अलावा क्रेन और पिकअप वाहन होने तथा इनके कथित तौर पर विभागीय कार्यों में इस्तेमाल की चर्चा भी सामने आ रही है।
यहीं से सवाल शुरू होता है—आमदनी कितनी और खर्च कितना?
महंगी कार रखना कोई अपराध नहीं है। किसी व्यक्ति के पास पारिवारिक संपत्ति, कारोबार या आय का अन्य वैध स्रोत हो सकता है। लेकिन जब किसी कर्मचारी की घोषित आय और उसके कथित रहन-सहन तथा खर्च में बड़ा अंतर दिखाई दे, तो पारदर्शिता के लिए दस्तावेजी जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।
दस हजार का मानदेय, लेकिन खर्च का गणित बड़ा!
सूत्रों के मुताबिक अमित सिंह की आउटसोर्सिंग नियुक्ति को करीब पांच वर्ष हुए हैं। इसी दौरान उनकी आर्थिक स्थिति में कथित रूप से बड़ा बदलाव आने की चर्चा है। यदि करीब 20 लाख रुपये कीमत की कार, 20 हजार रुपये मासिक ड्राइवर और अन्य वाहनों की बात सही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि इन सबका खर्च किस आय के स्रोत से पूरा होता है?
कार की कीमत के अलावा ईंधन, बीमा, सर्विसिंग, मरम्मत और ड्राइवर का वेतन—इन सबका हिसाब भी होता है।
सवाल कार रखने का नहीं, सवाल उसके आर्थिक स्रोत की पारदर्शिता का है।
हालांकि, इन दावों की किसी सक्षम जांच एजेंसी से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को तथ्य मानने के बजाय स्वतंत्र एवं दस्तावेजी जांच के जरिए सत्यापित किया जाना आवश्यक है।
कार के बाद अब स्टोर की ‘चाबी’ भी चर्चा में
अमित सिंह को लेकर दूसरा बड़ा सवाल पडरौना विद्युत उपकेंद्र के संवेदनशील स्टोर से जुड़ा बताया जा रहा है।
आरोप है कि आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटर होने के बावजूद अमित सिंह लंबे समय से स्टोर से जुड़े कार्यों में सक्रिय रहे। सवाल यह है कि क्या उन्हें स्टोर संचालन की लिखित जिम्मेदारी दी गई थी?

विभागीय चर्चाओं में गोरखपुर में तैनात बड़े बाबू योगेन्द्र कुमार गुप्ता का नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि स्टोर संबंधी जिम्मेदारी अमित सिंह को मौखिक रूप से दी गई। यदि ऐसा हुआ है तो इसका विधिवत आदेश क्या है? किस अधिकारी ने अनुमति दी? और किस नियम के तहत आउटसोर्सिंग कर्मचारी को सरकारी विद्युत सामग्री से जुड़े संवेदनशील कार्य की जिम्मेदारी दी गई?
इन सवालों का जवाब आरोपों से नहीं, सरकारी अभिलेखों से मिलना चाहिए।
स्टोर सरकारी है, जवाबदेही भी सरकारी होनी चाहिए
विद्युत विभाग के स्टोर में सरकारी सामग्री का लेखा-जोखा, स्टॉक, निर्गमन और प्राप्ति जैसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड होते हैं। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी नियमित रूप से स्टोर से जुड़े कार्य करता है तो उसकी जिम्मेदारी और अधिकार स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।
यदि कोई लिखित आदेश मौजूद है तो उसे सामने लाया जाए। यदि आदेश नहीं है तो विभाग यह स्पष्ट करे कि स्टोर का संचालन किस व्यवस्था के तहत किया जा रहा था।
जांच की जाए तो तस्वीर खुद सामने आ जाएगी
मामले में निष्पक्ष जांच के लिए विभाग को कई बिंदुओं पर रिकॉर्ड खंगालना होगा—अमित सिंह का नियुक्ति एवं मानदेय विवरण, वाहनों का स्वामित्व, खरीद संबंधी दस्तावेज, विभागीय कार्यों में निजी वाहनों के इस्तेमाल की अनुमति, ईंधन एवं रखरखाव का भुगतान, ड्राइवर के वेतन का स्रोत तथा स्टोर प्रभार से जुड़े आदेश।
इसके साथ ही स्टॉक रजिस्टर, निर्गमन अभिलेख और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की भी जांच होनी चाहिए।
कटाक्ष: ‘दस हजार की नौकरी’ का गणित आखिर कितना बड़ा है?
पडरौना बिजली उपकेंद्र की यह कहानी यदि सिर्फ अफवाह है तो दस्तावेज सामने रखिए और सवाल खत्म कीजिए। लेकिन यदि चर्चाओं के पीछे कुछ तथ्य हैं तो जांच से बचने की जरूरत ही क्या है?
दस हजार रुपये का मानदेय, लाखों की कार, 20 हजार का ड्राइवर, क्रेन-पिकअप और सरकारी स्टोर से जुड़ी कथित भूमिका—यह पूरा गणित आखिर किस किताब में लिखा है?
सरकार और विभाग पारदर्शिता की बात करते हैं। ऐसे में जनता को भी यही उम्मीद है कि आय, संपत्ति, वाहन और विभागीय जिम्मेदारी—हर सवाल का जवाब रिकॉर्ड से मिलेगा।
फिलहाल सवाल खड़े हैं और जवाब का इंतजार है।
नोट: रिपोर्ट में उल्लिखित आर्थिक स्थिति, वाहन, ड्राइवर एवं स्टोर संबंधी दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए जाने बाकी हैं। संबंधित कर्मचारी एवं विभागीय अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
सवाल जारी रहेगा… अगली कड़ी में दस्तावेजों की पड़ताल।
