
दुदही/कुशीनगर। सरकारी योजनाओं के तहत भवन बन जाए, विभागीय कागजों में केंद्र संचालित भी माना जाए और फिर भी बच्चों को अपेक्षित सुविधाएं न मिलें—तो सवाल सिर्फ व्यवस्था पर नहीं, बल्कि उस निगरानी तंत्र पर भी उठता है, जिसकी जिम्मेदारी सरकारी योजनाओं को जमीन पर उतारने की है। ग्राम सभा कुबेर भुवालपट्टी, विकासखंड दुदही में आंगनबाड़ी केंद्र को लेकर सामने आई शिकायत ने इसी व्यवस्था की पोल खोलने वाले कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शिकायतकर्ता चंद्रमणि पांडेय द्वारा शिकायत संख्या 40018926023754 के माध्यम से आरोप लगाया गया कि शासन के निर्देशानुसार करीब पांच वर्ष पूर्व आंगनबाड़ी केंद्र का भवन बनकर तैयार हो गया था और हैंडओवर भी कर दिया गया, लेकिन केंद्र का संचालन और व्यवस्थाएं अपेक्षित रूप से नहीं चल रही थीं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए 11 अगस्त 2026 को संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्री और सहायिका को साफ-सफाई, नियमित संचालन तथा विभागीय निर्देशों के अनुसार व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए। साथ ही केंद्र की दैनिक गतिविधियों और उपस्थिति से संबंधित आवश्यक फोटो एवं रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को भी कहा गया।
अब सवाल यह है कि अगर भवन पांच साल पहले तैयार हो चुका था, तो व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए शिकायत का इंतजार क्यों करना पड़ा? क्या विभागीय निरीक्षण और निगरानी केवल शिकायत सामने आने के बाद ही सक्रिय होती है? और यदि केंद्र पहले से ही पूरी तरह व्यवस्थित था, तो फिर निरीक्षण के बाद इतने निर्देश जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकारी योजनाओं का मकसद केवल भवन खड़ा करना नहीं, बल्कि उस भवन में बच्चों और लाभार्थियों तक योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अब असली परीक्षा कागजी कार्रवाई की नहीं, बल्कि धरातल पर होने वाले बदलाव की है।
देखना होगा कि निरीक्षण के बाद आंगनबाड़ी केंद्र वास्तव में नियमित और व्यवस्थित तरीके से चलता है या फिर कुछ दिनों की सक्रियता के बाद व्यवस्था दोबारा पुराने ढर्रे पर लौट जाती है। फिलहाल शिकायत के बाद हुई जांच ने विभागीय जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल जरूर छोड़ दिए हैं

