
आउटसोर्सिंग ऑपरेटर के स्टोर प्रभार पर घमासान, कार्रवाई के निर्देश के बाद भी फाइल क्यों सुस्त?
‘दस हजार की नौकरी’ से लेकर महंगी कार तक चर्चा, अब दस्तावेजों से खुलेगा राज या मामला फिर जाएगा ठंडे बस्ते में?
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। बिजली विभाग के पडरौना विद्युत उपकेन्द्र से जुड़ा स्टोर प्रभार का मामला अब विभागीय गलियारों से निकलकर जवाबदेही के कटघरे में पहुंचता दिखाई दे रहा है। आउटसोर्सिंग के जरिए ऑपरेटर पद पर तैनात बताए जा रहे अमित सिंह द्वारा स्टोर का प्रभार संभालने को लेकर सवाल उठने के बाद मामला मीडिया की सुर्खियों में आया। इसके बाद उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा मामले का संज्ञान लेकर जांच एवं कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई। मगर सवाल यही है कि निर्देश के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार आखिर इतनी धीमी क्यों है?
मामले में गोरखपुर बिजली विभाग के भंडारण पटल से जुड़े योगेन्द्र कुमार गुप्ता का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि उनके प्रभाव के चलते संबंधित मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में असली तस्वीर जांच और विभागीय अभिलेखों से ही साफ हो सकती है।

आउटसोर्सिंग ऑपरेटर को स्टोर का प्रभार किस आदेश से?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि अमित सिंह की मूल नियुक्ति ऑपरेटर पद पर हुई थी तो उन्हें स्टोर जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी किस आदेश के तहत सौंपी गई?
क्या कोई लिखित आदेश जारी हुआ?
किस सक्षम अधिकारी ने जारी किया?
क्या वह आदेश विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज है?
क्या आउटसोर्सिंग कर्मचारी को ऐसी जिम्मेदारी देने का कोई स्पष्ट प्रावधान है?
और यदि कोई आदेश नहीं है तो फिर स्टोर का काम किस आधार पर कराया गया?
बिजली विभाग का स्टोर महज सामान रखने की जगह नहीं बल्कि विभागीय उपकरणों और संसाधनों के लेखा-जोखा से जुड़ा महत्वपूर्ण पटल है। ऐसे में स्टॉक रजिस्टर, सामग्री प्राप्ति, निर्गमन और सत्यापन की जिम्मेदारी किसके नियंत्रण में रही—इसकी जांच बेहद जरूरी है।
गोरखपुर के ‘बड़े बाबू’ की भूमिका पर भी उठे सवाल
सूत्रों की मानें तो योगेन्द्र कुमार गुप्ता की भूमिका को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा है। आरोप लगाया जा रहा है कि उनके प्रभाव के कारण अमित सिंह को पडरौना में स्टोर संबंधी जिम्मेदारी मिली। इतना ही नहीं, अमित सिंह के भाई की देवरिया विद्युत उपकेन्द्र में तैनाती और वहां भी स्टोर संबंधी जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसीलिए सवाल किसी को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि दावों की अभिलेखीय जांच कराने का है। यदि योगेन्द्र गुप्ता की कोई भूमिका नहीं रही तो रिकॉर्ड सब साफ कर देगा और यदि कोई भूमिका रही तो उसका वैधानिक आधार भी सामने आना चाहिए।
‘दस हजार की नौकरी और महंगी कार’—चर्चा कितनी सच?
अमित सिंह की कथित आर्थिक स्थिति और संपत्ति को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। सीमित मानदेय पाने वाले आउटसोर्सिंग कर्मचारी के पास महंगे वाहन और अन्य सुविधाएं होने के दावे किए जा रहे हैं।
हालांकि महंगा वाहन होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। इसलिए यदि कोई ठोस शिकायत है तो वाहन स्वामित्व, आय के स्रोत और वित्तीय अभिलेखों की वैधानिक जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
अफवाह नहीं, रिकॉर्ड चाहिए।
यूपीपीसीएल के आदेश के बाद भी कार्रवाई क्यों ठंडी?
सबसे चुभता सवाल यही है कि जब मामला उच्च स्तर तक पहुंचा और जांच व कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई तो अब तक क्या कार्रवाई हुई?
जांच अधिकारी कौन है?
जांच कब शुरू हुई?
कौन-कौन से रिकॉर्ड देखे गए?
स्टोर का प्रभार किस आदेश से मिला?
स्टॉक का सत्यापन हुआ या नहीं?
जिम्मेदारी तय हुई या नहीं?
यदि कार्रवाई नहीं हुई तो उसका कारण क्या है?
इन सवालों का जवाब विभाग को देना चाहिए।
‘मैनेज’ की चर्चा भी जांच की मांग करती है
कार्रवाई लंबित रहने के बाद कथित तौर पर मामले को ‘मैनेज’ किए जाने जैसी चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऐसी चर्चाओं को समाप्त करने का सबसे आसान रास्ता पारदर्शी जांच है।
अगर आरोप गलत हैं तो जांच रिपोर्ट सामने आए।
अगर सब कुछ नियमसम्मत है तो संबंधित आदेश दिखाया जाए।
और यदि नियमों का उल्लंघन मिला है तो जिम्मेदारी तय हो।
यानी मामला साफ करने के लिए किसी ‘मैनेजमेंट’ की नहीं, सिर्फ निष्पक्ष जांच की जरूरत है।
अब निगाहें यूपीपीसीएल के निर्देश के अनुपालन पर टिकी हैं। देखना यह है कि विभागीय नियम अपनी ताकत दिखाते हैं या फिर ‘रसूख’ की चर्चाएं ही लंबी चलती रहती हैं।
क्योंकि सवाल सिर्फ अमित सिंह का नहीं—सवाल यह है कि बिजली विभाग में स्टोर की चाबी आखिर नियमों के हाथ में है या प्रभाव के?
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
