
गांधी चौक समेत प्रमुख मार्गों से रोज गुजरने का दावा, आम वाहन चालकों पर कार्रवाई और सरकारी वाहनों पर खामोशी को लेकर उठे सवाल
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर प्रशासन लगातार सख्ती का दावा करता है, लेकिन कुशीनगर शहर में नगर पालिका परिषद से जुड़ी कुछ चार पहिया गाड़ियों को लेकर अब व्यवस्था पर ही सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि नगर पालिका की दो दर्जन से अधिक गाड़ियां बिना नंबर प्लेट के शहर की सड़कों पर संचालित हो रही हैं। खास बात यह है कि इन वाहनों की आवाजाही कथित तौर पर उन प्रमुख मार्गों और चौराहों से भी होती है, जहां यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस की नियमित मौजूदगी रहती है।
नगर पालिका से जुड़ी इन गाड़ियों का इस्तेमाल कूड़ा उठाने, कचरे की ढुलाई, निर्माण सामग्री पहुंचाने तथा अन्य विभागीय कार्यों में किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ नंबर प्लेट का नहीं, बल्कि यह भी है कि यदि वाहन नियमित रूप से सार्वजनिक सड़कों पर संचालित हो रहे हैं तो उनके पंजीकरण और वैध दस्तावेजों की स्थिति क्या है?

गांधी चौक पर पुलिस की मौजूदगी, फिर भी कैसे निकल जाती हैं गाड़ियां?
शहर का गांधी चौक यातायात की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां पुलिस और यातायात कर्मियों की मौजूदगी रहती है तथा विभिन्न दिशाओं से आने-जाने वाले वाहनों की आवाजाही होती है। इसके बावजूद यदि नगर पालिका की बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां नियमित रूप से इसी मार्ग से गुजर रही हैं, तो उनकी जांच क्यों नहीं हुई—यह सवाल अब चर्चा का विषय बन गया है।
आम वाहन चालकों से नंबर प्लेट, हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट और अन्य दस्तावेजों को लेकर जांच एवं चालान की कार्रवाई की जाती है। ऐसे में सरकारी निकाय से संबंधित वाहनों के मामले में भी समान नियम लागू होने चाहिए या नहीं, यह सवाल उठना स्वाभाविक है।

जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी में होने का दावा
बताया जा रहा है कि संबंधित वाहन नगर पालिका परिसर से निकलते हैं और विभागीय कार्यों के बाद वापस लौटते हैं। यदि वाहनों का संचालन इसी तरह लंबे समय से हो रहा है, तो नगर पालिका प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी होने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद वाहनों की वैधता और नंबर प्लेट को लेकर अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह जांच का विषय बन गया है।
बिना पंजीकरण चिन्ह के वाहन सड़क पर पाए जाने की स्थिति में दुर्घटना, यातायात उल्लंघन या किसी अन्य घटना के दौरान वाहन की पहचान को लेकर भी व्यावहारिक कठिनाई पैदा हो सकती है। ऐसे में वाहनों की वैधता की जांच केवल औपचारिकता न होकर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा विषय भी है।
एआरटीओ ने माना—नियम विरुद्ध है
मामले में एआरटीओ दिलीप कुमार गुप्ता से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि यदि वाहन बिना नंबर प्लेट के संचालित हो रहे हैं तो यह नियम विरुद्ध है। प्रत्येक वाहन पर उसका पंजीयन चिन्ह होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस तरह के वाहनों का संचालन हो रहा है तो यह जांच का विषय है और सड़क पर ऐसा वाहन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एआरटीओ के इस बयान के बाद अब निगाहें कार्रवाई पर टिक गई हैं। क्या नगर पालिका की सभी संबंधित गाड़ियों की जांच कर उनके पंजीकरण, नंबर प्लेट और दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाएगा? क्या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदारी तय होगी? और यदि लंबे समय से ऐसे वाहन सड़कों पर चल रहे हैं तो अब तक उनकी जांच क्यों नहीं हुई?
फिलहाल मामला एक साधारण नंबर प्लेट की कमी से आगे बढ़कर सरकारी व्यवस्था में नियमों के समान अनुपालन का सवाल बन गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को महज शिकायत मानकर छोड़ देता है या नगर पालिका की इन गाड़ियों की वास्तविक स्थिति की जांच कर ठोस कार्रवाई करता है।
