

तमकुहीराज/कुशीनगर। (विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता)। थाना बरवापट्टी क्षेत्र में पुलिसकर्मियों द्वारा कथित रूप से शराब ले जाए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की ओर से जारी स्पष्टीकरण ने विवाद को खत्म करने के बजाय कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही दुकान मिठाई एवं चखने की दुकान है और वहां अवैध शराब की बिक्री के संबंध में कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया गया तथा शराब बरामद की गई। पुलिस ने वीडियो को गलत एवं भ्रामक बताते हुए संबंधित सोशल मीडिया हैंडल के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही है।
लेकिन अब असली सवाल वायरल वीडियो से आगे बढ़कर उस दुकान के संचालन की वैधता और शराब की दुकान के आसपास की गतिविधियों की निगरानी पर आ खड़ा हुआ है।
पुलिस के स्पष्टीकरण में एक ओर दुकान को ‘मिठाई और चखने की दुकान’ बताया गया है, वहीं दूसरी ओर आबकारी व्यवस्था को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि शराब की दुकान के परिसर अथवा उससे सटे स्थान पर शराब पीने वालों के लिए चखने की सामग्री उपलब्ध कराने वाली दुकान आखिर किस अनुमति और किस नियम के तहत संचालित हो रही थी?
यदि संबंधित दुकान वास्तव में केवल मिठाई अथवा खाद्य सामग्री बेचने वाली सामान्य दुकान थी, तो उसकी स्थिति और गतिविधियों का स्पष्ट सत्यापन जांच का हिस्सा होना चाहिए। वहीं यदि वहां शराब पीने वालों को चखना उपलब्ध कराया जा रहा था, तो यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि उसके संचालन के लिए किस विभाग की अनुमति थी और दुकान की गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप थीं या नहीं।
यही वह बिंदु है, जहां पुलिस के स्पष्टीकरण और जमीनी स्थिति के बीच उठ रहे सवालों का जवाब जरूरी हो जाता है। सिर्फ किसी दुकान को ‘मिठाई की दुकान’ या ‘चखने की दुकान’ कह देने भर से उसकी गतिविधियों की वैधता स्वतः सिद्ध नहीं हो जाती। दुकान किस परिसर में चल रही थी, किसके स्वामित्व या अनुज्ञा में थी, वहां कौन-कौन सी गतिविधियां हो रही थीं और संबंधित विभागों ने उसका कभी निरीक्षण किया था या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच आवश्यक है।
शराब की दुकानों के आसपास अनधिकृत गतिविधियों को लेकर आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि शराब की दुकान के बिल्कुल पास ऐसी दुकान लंबे समय से संचालित थी, जहां शराब खरीदने वाले लोग बैठकर सेवन करते थे या उनके लिए चखने की व्यवस्था की जाती थी, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित निरीक्षण के दौरान जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस गतिविधि पर क्यों नहीं पड़ी?
वहीं पुलिस द्वारा अवैध शराब की बिक्री के मामले में मुकदमा दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। यदि वास्तव में अवैध शराब की बिक्री पकड़ी गई है तो यह कार्रवाई कानून के अनुसार स्वागत योग्य है। लेकिन इसके साथ ही यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि अवैध शराब कहां से आई, किसके कब्जे से बरामद हुई, दुकान संचालक की भूमिका क्या थी और शराब की दुकान के आसपास यह गतिविधि कितने समय से चल रही थी।
वायरल वीडियो को लेकर यदि पुलिस का दावा है कि वीडियो भ्रामक अथवा गलत है, तो जांच के आधार पर इसकी वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए। वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियों, स्थान, दुकान और उसमें मौजूद लोगों की पहचान तथा पूरे घटनाक्रम का
तथ्यात्मक सत्यापन किया जाना जरूरी है। केवल सोशल मीडिया पोस्ट को गलत बताकर मामले को समाप्त करने के बजाय उसके पीछे उठे प्रत्येक सवाल का जवाब देना ही पारदर्शिता की कसौटी होगी।
क्षेत्राधिकारी तमकुहीराज जयंत यादव की ओर से पुलिस का पक्ष सामने रखा गया है। पुलिस की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन अब निगाहें आबकारी विभाग की भूमिका पर भी टिक गई हैं। आखिर शराब की दुकान के आसपास संचालित इस कथित ‘चखने की दुकान’ की स्थिति क्या थी? क्या उसका कोई वैध खाद्य कारोबार पंजीकरण या स्थानीय अनुमति थी? क्या वह शराब दुकान के अनुज्ञापी परिसर का हिस्सा थी अथवा अलग परिसर में थी? और सबसे अहम—क्या वहां शराब सेवन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी?
इन सवालों का जवाब दस्तावेजों और मौके की जांच से ही सामने आ सकता है।
जरूरत इस बात की है कि पुलिस और आबकारी विभाग संयुक्त रूप से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करें। यदि दुकान नियमानुसार संचालित थी तो संबंधित अनुमति और नियमों की स्थिति स्पष्ट की जाए। यदि नियमों का उल्लंघन मिला तो केवल दुकान संचालक ही नहीं, बल्कि निगरानी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए।
क्योंकि मामला केवल एक वायरल वीडियो का नहीं है। मामला यह भी है कि शराब की दुकानों के आसपास क्या गतिविधियां चल रही हैं, उनकी निगरानी कौन कर रहा है और नियमों का पालन जमीन पर वास्तव में कितना हो रहा है।
अब सवाल सीधा है—अगर दुकान वैध थी तो उसकी वैधता का आधार क्या था? और अगर नियमों के विपरीत गतिविधि चल रही थी, तो जिम्मेदार कौन है?
जनता को मुकदमे और स्पष्टीकरण से आगे बढ़कर इन सवालों के स्पष्ट, तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब का इंतजार है।
VFT NEWS | कुशीनगर
सवाल वही—नियम क्या कहते हैं और जमीन पर हो क्या रहा है?
