
निजी अस्पताल पर गंभीर लापरवाही का आरोप, आक्रोशित परिजनों ने मांगी जांच और कार्रवाई; पुलिस के आश्वासन पर खुला रास्ता
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। पडरौना नगर के छावनी क्षेत्र में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 30 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा। अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने शव को सड़क किनारे रख दिया और पडरौना से जिला मुख्यालय रविंद्रनगर धूस जाने वाले मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। अचानक सड़क जाम होने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो गई और मौके पर काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
मृतका की पहचान बिहार के धनहा निवासी अंगिरा चौहान (30), पत्नी चतुरी चौहान के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, अंगिरा किसी काम से पडरौना आई थीं। बताया गया कि वापस घर लौटते समय बाइक से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट लग गई। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल छावनी क्षेत्र स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका उपचार शुरू किया गया।
बताया जा रहा है कि महिला की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल से संबद्ध मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर किया। परिजनों का कहना है कि वहां से भी महिला को बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी गई थी। इसी बीच परिजनों ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल परिसर में मौजूद सरस हॉस्पिटल के कथित एजेंटों ने बेहतर उपचार और सुविधाओं का भरोसा दिलाकर महिला को दोबारा छावनी स्थित सरस हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया।
परिजनों के मुताबिक, अस्पताल में उपचार शुरू होने के कुछ समय बाद ही महिला की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध शुरू कर दिया। उनका यह भी आरोप है कि महिला के इलाज के नाम पर रातभर में उनसे मोटी रकम ली गई, लेकिन आखिरकार मरीज की जान नहीं बच सकी।
मामला यहीं नहीं थमा। आक्रोशित परिजनों ने महिला का शव सड़क पर रखकर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि जिलाधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच कराएं। परिजन संबंधित अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई और अस्पताल को सील कराने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा नहीं मिलता, तब तक शव को पोस्टमार्टम के लिए नहीं ले जाने दिया जाएगा।
सड़क जाम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में भी हलचल मच गई। कोतवाली प्रभारी ओमप्रकाश तिवारी तथा सुभाष चौक पुलिस चौकी प्रभारी अमित सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित परिजनों से बातचीत कर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। पुलिस ने मामले में नियमानुसार जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया। काफी समझाने के बाद परिजनों ने शव को सड़क से हटाया, जिसके बाद यातायात व्यवस्था सामान्य हो सकी।
अंगिरा चौहान की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतका अपने पीछे दो मासूम बेटियां छोड़ गई हैं। मां की असमय मौत के बाद दोनों बच्चियों के सिर से ममता का साया उठ गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे घर में मातम पसरा हुआ है।
फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। कोतवाली प्रभारी ओमप्रकाश तिवारी के अनुसार, महिला की इलाज के दौरान मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति स्पष्ट होगी। रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इलाज के दौरान वास्तव में किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई? परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही इसका जवाब सामने आएगा। फिलहाल पूरे मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच निर्णायक भूमिका निभाएगी।
