
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | संवाददाता विशेष रिपोर्ट
कुशीनगर। तहसील तमकुहीराज के ग्राम सभा कुबेरा भुसावल पट्टी में राजस्व अभिलेखों में भारी अनियमितता और कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। ग्राम समाज की भूमि, जो सरकारी रिकॉर्ड में “नवीन परती” के रूप में दर्ज है, उसके संबंध में पारदर्शिता न होने से विवाद गहराता जा रहा है। शिकायतकर्ता धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय, ग्राम निवासी, ने प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी कर ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा दर्शाया गया है।
धर्मेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि उन्होंने लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार, एसडीएम और डीएम कुशीनगर तक कई प्रार्थना पत्र देकर अभिलेखों के सत्यापन और संशोधन की मांग की, लेकिन कार्रवाई के बजाय हर बार “पट्टा धारकों के कब्जे” का हवाला देकर मामला टाल दिया गया। शिकायतकर्ता का सवाल है — “जब भूमि ग्राम समाज की है, तो आखिर किसे, कब और किस नियम के तहत पट्टा दिया गया?”
उन्होंने बताया कि 3 फरवरी 2025 को दायर सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब में जो दस्तावेज मिले, वे अधूरे और भ्रामक हैं। RTI की धारा 6(1) और 7(1) के तहत मांगी गई पूरी सूचना न देना, अधिनियम का उल्लंघन है। “ना तो पट्टा आदेश की प्रति दी गई, ना नामांतरण आदेश और खतौनी प्रविष्टि की वैधता बताई गई,” — शिकायतकर्ता का कहना है।
📘 क्या कहते हैं राजस्व नियम?
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की कई धाराएँ इस मामले को गंभीर बनाती हैं:
धारा 67, 68, 122-B: ग्राम समाज की भूमि पर गलत प्रविष्टि या फर्जी कब्जे पर कार्रवाई का प्रावधान।
धारा 33 व 35: अभिलेख संशोधन और दर्ज नाम के सत्यापन का अधिकार।
धारा 219: राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही तय करती है।
इन धाराओं के मुताबिक, राजस्व अधिकारियों को स्वतः संज्ञान लेकर सत्यापन और संशोधन करना चाहिए। लेकिन पाण्डेय का आरोप है कि “तहसील स्तर पर जानबूझकर फाइल दबा दी गई है, जिससे सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ कमजोर पड़ती दिख रही है।”
🧾 जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने DM कुशीनगर से उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने, पट्टा आवंटन की वैधता की जांच, खतौनी-खसरा सार्वजनिक करने और लेखपाल की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है — “यदि अभिलेख सही हैं तो सार्वजनिक किए जाएं, और यदि गड़बड़ी है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने पारदर्शी जांच नहीं की, तो वे जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि “भूमाफिया और कुछ राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से गरीबों की भूमि हड़पी जा रही है, और प्रशासन मौन है।”
🕵️ प्रशासन की चुप्पी और RTI अपील की तैयारी
अब तक तहसील तमकुहीराज प्रशासन ने इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। वहीं शिकायतकर्ता ने कहा कि यदि IGRS पोर्टल पर उनकी शिकायत की प्रगति सार्वजनिक नहीं की गई, तो वे प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के समक्ष RTI अपील दायर करेंगे।
⚖️ अब निगाहें प्रशासन पर
कुबेरा भुसावल पट्टी का यह मामला न केवल ग्राम समाज की भूमि से जुड़ा है, बल्कि यह पूरे राजस्व तंत्र की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है। यदि निष्पक्ष जांच हुई तो गड़बड़ी में शामिल लोगों पर कार्रवाई संभव है, अन्यथा यह मामला भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
अब देखना यह है कि डीएम कुशीनगर इस गंभीर शिकायत पर कितनी तत्परता दिखाते हैं, और क्या धर्मेन्द्र कुमार पाण्डेय को न्याय मिल पाता है या नहीं।




