



विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के तहसील तमकुहीराज में एक बार फिर जमीनी विवाद ने ऐसा विस्फोटक रूप ले लिया है, जिसने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिया है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया है। मामला नगर पंचायत तमकुहीराज के वार्ड नंबर-01, अंबेडकर नगर का है, जहां निवासी बजकिशोर यादव (पुत्र सूरज यादव) न्याय की आस में पानी की टंकी पर चढ़ गए और घंटों तक हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा।
यह कोई फिल्मी दृश्य नहीं, बल्कि उस हकीकत का आईना है जहां न्याय की उम्मीद जमीन से खत्म हो चुकी है और पीड़ितों को आसमान की ऊंचाई से गुहार लगानी पड़ रही है। सवाल सीधा है—क्या अब न्याय पाने के लिए लोगों को जान जोखिम में डालनी होगी?
टंकी पर चढ़कर न्याय की पुकार
बताया जाता है कि दोपहर करीब 2 बजे बजकिशोर यादव अचानक पानी की टंकी पर चढ़ गए और जोर-जोर से प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनका आरोप है कि तहसील और पुलिस प्रशासन जानबूझकर उनके मामले को लटकाए हुए है और विपक्षी पक्ष को खुली छूट दी जा रही है।
पीड़ित का कहना है कि उसकी जमीन, जो आराजी संख्या 196 (रकबा 384 डिसमिल) में स्थित है, पहले ही तहसील प्रशासन द्वारा जब्त की जा चुकी है। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष वहां निर्माण कार्य कर रहा है, जबकि उसके अपने निर्माण को प्रशासन और पुलिस द्वारा बार-बार रोका जा रहा है। यह दोहरा मापदंड आखिर क्यों?
“जीरो टॉलरेंस” का ढोल या खोखला नारा?
प्रदेश सरकार भले ही “जीरो टॉलरेंस” की नीति का ढिंढोरा पीट रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। तमकुहीराज तहसील में पीड़ित दर-दर भटक रहा है, लेकिन न्याय के नाम पर उसे सिर्फ आश्वासन का झुनझुना थमाया जा रहा है।
यह पहला मामला नहीं है जब कोई पीड़ित टंकी या मोबाइल टावर पर चढ़ा हो। सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? या फिर हर बार कोई अपनी जान जोखिम में डाले, तभी फाइलें चलेंगी?
राजस्व निरीक्षक पर गंभीर आरोप
बजकिशोर यादव ने राजस्व निरीक्षक राजेंद्र यादव पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि राजस्व निरीक्षक विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर गलत रिपोर्ट दे रहे हैं, जिससे उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।
पीड़ित का दावा है कि पहले भी राजस्व टीम द्वारा भूमि की पैमाइश की जा चुकी है, लेकिन उसके बावजूद निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो रही। उल्टा, उन्हें ही रोका जा रहा है और विपक्षी पक्ष को खुली छूट दी जा रही है।
“हम जाएं तो जाएं कहां?”—पीड़ित की बेबसी
टंकी पर खड़े होकर बजकिशोर यादव बार-बार यही सवाल दोहराते रहे—“हम जाएं तो जाएं कहां?” यह सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों पीड़ितों का है जो तहसील और थाने के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं।
अब स्थिति यह हो गई है कि लोग न्याय के लिए माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे हैं, क्योंकि स्थानीय स्तर पर उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही।
पहले भी हो चुका है टंकी ड्रामा
सूत्रों के अनुसार, 16 अप्रैल को भी बजकिशोर यादव इसी तरह टंकी पर चढ़ गए थे और करीब ढाई घंटे तक हंगामा चला था। उस समय तहसीलदार महेश कुमार ने मौके पर पहुंचकर उन्हें समझाया और आश्वासन दिया था कि जब तक विवाद का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक कोई भी पक्ष निर्माण कार्य नहीं करेगा।
तहसीलदार ने पीड़ित की समस्याओं को विस्तार से सुना और निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके बाद भाजपा नेता अजय राय, केशव पांडेय, सब-इंस्पेक्टर अखिलेश यादव और अन्य लोगों की मौजूदगी में बैठक भी हुई थी।
लेकिन सवाल यह है कि जब आश्वासन दिया जा चुका था, तो फिर दोबारा यह स्थिति क्यों बनी? क्या प्रशासन अपने ही वादों से मुकर गया?
जिलाधिकारी से मिलने की जिद, कूदने की धमकी
फिलहाल बजकिशोर यादव जिलाधिकारी से मिलने की मांग पर अड़े हुए हैं और टंकी से कूदने की धमकी भी दे रहे हैं। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय लोग भय और चिंता में डूबे नजर आए।
प्रशासन की परीक्षा की घड़ी
यह घटना प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला बड़ा रूप ले सकता है। सवाल यह भी है कि क्या सिर्फ आश्वासन देकर मामले को दबा दिया जाएगा, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
कटाक्ष: फाइलों में न्याय, जमीन पर अन्याय
तमकुहीराज की यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कागजों में न्याय और जमीन पर अन्याय का खेल बदस्तूर जारी है। जब तक कोई टंकी पर न चढ़े, तब तक शायद फाइलें भी नहीं चढ़तीं।
“जीरो टॉलरेंस” का नारा अब मजाक बनता जा रहा है, जहां भ्रष्टाचार और पक्षपात खुलेआम नाच रहे हैं और पीड़ित इंसाफ के लिए आसमान का सहारा ले रहा है।
अब क्या होगा?
अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। क्या जिलाधिकारी खुद संज्ञान लेंगे? क्या निष्पक्ष जांच होगी? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
एक बात तो साफ है—यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो यह “टंकी कांड” किसी बड़े हादसे में भी बदल सकता है।
(विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर प्रशासन से मांग करता है कि इस मामले में तत्काल निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी पीड़ित अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर न हो।)
