


कुशीनगर, 16 जुलाई | विलेज फास्ट टाइम्स | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के विकास खंड पडरौना स्थित ग्राम पंचायत सोहनरिया में जल जीवन मिशन के तहत संचालित ग्रामीण पेयजल योजना अब ग्रामीणों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। वर्षों तक पेयजल संकट से जूझने वाले इस गांव में अब हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। इसी व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखने के लिए गुरुवार को मुख्य अभियन्ता (गो०क्षे०), उ०प्र० जल निगम (ग्रामीण), गोरखपुर वी.पी. सिंह ने अधिकारियों की टीम के साथ योजना का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों से सीधे संवाद कर जलापूर्ति व्यवस्था का फीडबैक लिया गया, जिसमें ग्रामीणों ने योजना को पूरी तरह लाभकारी बताते हुए नियमित जलापूर्ति पर संतोष व्यक्त किया।
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियन्ता के साथ अधिशासी अभियन्ता सुनील कुमार, सहायक अभियन्ता, जूनियर इंजीनियर, कार्यदायी संस्था मे० एन०सी०सी० लिमिटेड के प्रतिनिधि, डीपीएमयू, टीपीआईए के अधिकारी, ग्राम प्रधान जितेन्द्र राजभर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अधिकारियों ने जलाशय, पम्पिंग प्लांट, पाइपलाइन तथा अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण कर संचालन व्यवस्था का जायजा लिया।
मुख्य अभियन्ता वी.पी. सिंह ने बताया कि जल जीवन मिशन फेज-3 के अंतर्गत स्वीकृत सोहनरिया ग्रामीण पेयजल योजना का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कराया जा चुका है। योजना के तहत आधुनिक तकनीक से युक्त एक ट्यूबवेल, पम्पिंग प्लांट, सोलर प्रणाली, 275 किलोलीटर क्षमता का 12 मीटर ऊंचाई वाला शिरोपरि जलाशय, अत्याधुनिक पम्प हाउस, बाउंड्रीवाल, मुख्य द्वार, लगभग 11.9 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन तथा 678 घरों में जल संयोजन उपलब्ध कराया गया है। इससे गांव के प्रत्येक परिवार को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
निरीक्षण के दौरान मुख्य अभियन्ता ने ग्रामीणों से जल संरक्षण का आह्वान करते हुए कहा कि जल है तो कल है। उन्होंने लोगों से अपील की कि शुद्ध पेयजल का सदुपयोग करें, पानी की बर्बादी रोकें तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सरकार केवल पाइपलाइन बिछाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रही, बल्कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यह ऐतिहासिक अभियान संचालित किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि योजना शुरू होने के बाद उन्हें नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल मिल रहा है। पहले जहां पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब घर-घर नल से पानी पहुंचने से महिलाओं और बच्चों को बड़ी राहत मिली है। ग्रामीणों ने बताया कि स्वच्छ पानी मिलने से पेयजल जनित बीमारियों में भी कमी आई है और दैनिक जीवन पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाजनक हो गया है। ग्राम प्रधान सहित ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और जल निगम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे गांव के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
मुख्य अभियन्ता ने बताया कि जनपद कुशीनगर में जल जीवन मिशन के फेज-2 एवं फेज-3 के अंतर्गत कुल 453 ग्रामीण पेयजल योजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से 667 ग्राम पंचायतों के 904 राजस्व ग्रामों में 3,34,718 गृह जल संयोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 454 ट्यूबवेल, 454 पम्प हाउस, 454 शिरोपरि जलाशय तथा 6,448 किलोमीटर लंबी वितरण पाइपलाइन प्रस्तावित है। अब तक 454 ट्यूबवेल, 442 पम्प हाउस, 250 शिरोपरि जलाशय तथा 6,252 किलोमीटर वितरण प्रणाली का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष कार्य युद्धस्तर पर जारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी परियोजनाएं पूरी कर प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण पेयजल योजनाओं से जुड़ी किसी भी समस्या, शिकायत अथवा जानकारी के लिए आमजन “जल सारथी ऐप” का उपयोग कर सकते हैं। इस डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से शिकायतों का त्वरित निस्तारण एवं योजनाओं की निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।
सोहनरिया में हुआ यह निरीक्षण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि इस बात का प्रमाण बना कि जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने की दिशा में सरकार और जल निगम का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने का यह प्रयास ग्रामीणों के बेहतर स्वास्थ्य, सम्मानजनक जीवन और समग्र विकास की मजबूत आधारशिला साबित हो रहा है।
