
17 जुलाई | विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर में स्कूली छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि विद्यालयी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय निर्धारित सुरक्षा मानकों की अनदेखी करता पाया गया, तो संबंधित वाहन का पंजीयन निलंबित करने से लेकर विद्यालय की मान्यता निरस्त करने तक की कठोर कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर विद्यालय प्रबंधन के विरुद्ध आपराधिक एवं अन्य विधिक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
एआरटीओ ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक विद्यालय में विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। यह समिति विद्यालय से जुड़े सभी वाहनों की फिटनेस, परमिट, बीमा, प्रदूषण प्रमाण-पत्र, चालक के वैध ड्राइविंग लाइसेंस, पुलिस सत्यापन, प्राथमिक उपचार किट, अग्निशमन यंत्र तथा अन्य सुरक्षा मानकों की नियमित समीक्षा और सत्यापन सुनिश्चित करेगी। साथ ही प्रत्येक चालक का वर्ष में कम से कम एक बार स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण कराना भी अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में सभी विद्यालय प्रबंधकों एवं प्रधानाचार्यों को स्पष्ट कर दिया गया है कि विद्यालय में अध्ययनरत प्रत्येक छात्र की सुरक्षित यात्रा की संपूर्ण जिम्मेदारी विद्यालय प्रबंधन की होगी। विद्यालय द्वारा संचालित बस, वैन एवं अन्य वाहन मोटर वाहन अधिनियम-1988, केंद्रीय मोटरयान नियमावली-1989, AIS-063, AIS-125 तथा उत्तर प्रदेश मोटरयान नियमावली-2019 के सभी प्रावधानों का पूर्णतः पालन करते हुए ही संचालित किए जाएंगे।
डॉ. गुप्ता ने जानकारी दी कि 1 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक जनपद में “मिशन सेफ फ्यूचर” विशेष अभियान चलाकर विद्यालयी वाहनों का व्यापक निरीक्षण किया गया। अभियान के दौरान सुरक्षा उपकरणों, दस्तावेजों और तकनीकी मानकों की गहन जांच कर नियमों के अनुपालन का सत्यापन किया गया। जिन विद्यालयों में कमियां मिलीं, उन्हें तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने दोहराया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी विद्यालय संचालकों को परिवहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठकें आयोजित करने, वाहनों की समय-समय पर जांच कराने तथा किसी भी कमी का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
परिवहन विभाग ने साफ कर दिया है कि अब नियम केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उनका कड़ाई से पालन कराया जाएगा। विभाग का मानना है कि सुरक्षित विद्यालयी परिवहन केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि विद्यालय प्रबंधन की भी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे में जो संस्थान सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन करेंगे, वही विद्यार्थियों के सुरक्षित भविष्य की मजबूत नींव रख पाएंगे, जबकि लापरवाही बरतने वालों पर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जाएगी।
