
मूल लाइसेंस की हूबहू नकल तैयार कर ग्राहकों से वसूली जा रही थी मनमानी रकम, दो आरोपी गिरफ्तार; लैपटॉप, मोबाइल, प्रिंटर और स्मार्ट कार्ड चिप समेत भारी मात्रा में उपकरण बरामद
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जिले में फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों को गुमराह करने वाले गिरोह पर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। रविन्द्रनगर धूस थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कथित तौर पर फर्जी एवं कूटरचित ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करने के मामले का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से आरटीओ कार्यालय के आसपास सक्रिय ऑनलाइन दस्तावेज बनाने वाले संदिग्ध नेटवर्क पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जमीर अहमद निवासी भिसवा सरकारी तथा श्यामजी निवासी बसडीला, थाना रविन्द्रनगर धूस के रूप में हुई है। आरोप है कि जमीर अहमद आरटीओ कार्यालय के नजदीक कम्प्यूटर सेंटर संचालित करता था। इसी दुकान की आड़ में दोनों मिलकर फर्जी स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस तैयार करने का कथित अवैध कारोबार चला रहे थे।
जांच में सामने आई कार्यप्रणाली के अनुसार, आरोपी दिन में दुकान पर आने वाले लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन बीमा और आरसी संबंधी ऑनलाइन कार्य करते थे। इसी दौरान तत्काल हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की जरूरत बताने वाले ग्राहकों का डेटा हासिल कर उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से कथित तौर पर मूल लाइसेंस जैसी हूबहू नकल तैयार कर मनमानी रकम वसूलते थे।
बरामदगी ने खोली जालसाजी की परतें
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो फर्जी स्मार्ट ड्राइविंग लाइसेंस, 10 पीवीसी स्मार्ट कार्ड चिप, दो लैपटॉप, दो मोबाइल फोन, एक कैनन प्रिंटर-स्कैनर और 4,830 रुपये नकद बरामद किए हैं।
इस मामले में थाना रविन्द्रनगर धूस पर मुकदमा अपराध संख्या 178/2026 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 339 में अभियोग दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार जमीर अहमद का पूर्व आपराधिक इतिहास भी सामने आया है।
कार्रवाई में थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह, साइबर सेल प्रभारी सुनील कुमार सिंह सहित रविन्द्रनगर धूस पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम शामिल रही।
अब बड़ा सवाल यह है कि इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए कितने लोगों को लाइसेंस जारी किए गए और कितने वाहन चालक ऐसे दस्तावेजों के सहारे सड़कों पर दौड़ रहे हैं? पुलिस की आगे की जांच से इस नेटवर्क के अन्य संभावित संपर्कों का खुलासा होने की उम्मीद है।
