
चंद्र दर्शन के बाद विधि-विधान से संपन्न हुई पूजा-अर्चना, दांपत्य प्रेम और भारतीय संस्कृति की दिखी मनमोहक झलक
गोरखपुर। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में करवा चौथ का पर्व पति-पत्नी के अटूट प्रेम, आपसी विश्वास, समर्पण और जीवनभर साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक माना जाता है। इस पावन अवसर पर प्रेम, सम्मान और पारिवारिक संस्कारों की खूबसूरत झलक देखने को मिली, जब राष्ट्रीय सर्व जनकल्याण संकल्प पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गोरखपुर के चर्चित समाजसेवी डॉ. कुलदीप पाण्डेय ने अपनी धर्मपत्नी शैलजा पाण्डेय को चंद्र दर्शन और विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद जल ग्रहण कराकर उनका व्रत पूर्ण कराया।
डॉ. कुलदीप पाण्डेय के निवास स्थान राजेंद्र नगर पश्चिमी स्थित गोकुलधाम में करवा चौथ का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा के साथ मनाया गया। उनकी धर्मपत्नी शैलजा पाण्डेय ने अपने वैवाहिक जीवन के पांचवें करवा चौथ पर पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखा। दिनभर उपवास के बाद रात्रि आठ बजे चंद्र दर्शन कर उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और अपने आराध्य से दांपत्य जीवन की सुख-शांति एवं खुशहाली की प्रार्थना की।
इसके बाद डॉ. कुलदीप पाण्डेय ने अपनी धर्मपत्नी को जल ग्रहण कराकर व्रत खुलवाया। यह आत्मीय पल केवल एक पारंपरिक रस्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पति-पत्नी के बीच स्नेह, विश्वास, परस्पर सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव की सुंदर अभिव्यक्ति बन गया। इस अवसर ने भारतीय पारिवारिक मूल्यों और वैवाहिक रिश्तों की मधुरता को भी रेखांकित किया।
करवा चौथ का संदेश केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं, बल्कि रिश्तों को प्रेम, विश्वास और सम्मान से सींचने में निहित है। जीवन की खुशियों से लेकर कठिन परिस्थितियों तक एक-दूसरे का हाथ थामे रखना ही दांपत्य जीवन की असली मजबूती है। पति-पत्नी का रिश्ता जब आपसी समझ, समर्पण और सहयोग से मजबूत होता है, तब जीवन का हर पड़ाव खूबसूरत बन जाता है।
डॉ. कुलदीप पाण्डेय और शैलजा पाण्डेय के करवा चौथ का यह अवसर भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था, पारिवारिक संस्कारों और दांपत्य प्रेम की मधुर तस्वीर प्रस्तुत करता है। यह पर्व प्रेम के उस विश्वास को भी जीवंत करता है, जिसमें दो जीवन एक-दूसरे के सुख, स्वास्थ्य और खुशियों के लिए सदैव समर्पित रहने का संकल्प लेते हैं।
