
विलेज फास्ट टाइम्स | जनपद कुशीनगर | विशेष संवाददाता
पुलिस कार्यालय में प्रार्थना पत्रों का अंबार व्यवस्था पर भी खड़े करता है सवाल
कुशीनगर। पुलिस अधीक्षक श्री केशव कुमार द्वारा पुलिस कार्यालय में पहुंचने वाले फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विस्तारपूर्वक सुना जा रहा है। दूर-दराज क्षेत्रों से अपनी शिकायतें लेकर पहुंच रहे पीड़ितों की बात सुनकर पुलिस अधीक्षक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का न्यायोचित, निष्पक्ष एवं विधिसम्मत निस्तारण कराया जाएगा। इस दौरान संबंधित अधिकारियों एवं थाना प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए जा रहे हैं। लेकिन पुलिस कार्यालय में लगातार पहुंच रहे प्रार्थना पत्रों और फरियादियों की संख्या एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है—यदि स्थानीय थानों पर हर पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से सुना जाता, समयबद्ध कार्रवाई होती और न्याय की उम्मीद पूरी होती, तो आखिर जिला मुख्यालय तक प्रार्थना पत्रों का अंबार क्यों लगता? यही वह सवाल है, जो व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सीधा कटाक्ष करता है। आम फरियादी आखिर कई-कई किलोमीटर का सफर तय कर पुलिस अधीक्षक कार्यालय क्यों पहुंचे? क्या स्थानीय स्तर पर उसकी बात पूरी तरह नहीं सुनी गई, या फिर उसे अपनी समस्या के समाधान के लिए उच्चाधिकारी तक पहुंचना जरूरी समझ में आया? पुलिस कार्यालय में पहुंच रहे प्रत्येक प्रार्थना पत्र के पीछे किसी न किसी पीड़ित की उम्मीद, परेशानी और न्याय की तलाश छिपी हुई है। पुलिस अधीक्षक श्री केशव कुमार द्वारा फरियादियों की बात स्वयं सुनना निश्चित रूप से पीड़ितों के लिए भरोसे की बड़ी किरण है। शिकायतों को केवल कागज का टुकड़ा न मानकर संबंधित अधिकारियों को जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देना यह संदेश देता है कि पीड़ित की आवाज को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जो न्याय और सुनवाई जिला मुख्यालय में मिल रही है,
वही संवेदनशीलता प्रत्येक थाना स्तर पर भी दिखाई दे। क्योंकि फरियादी का भरोसा तभी मजबूत होगा, जब उसे अपनी शिकायत लेकर बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। सवाल साफ है—थानों पर मजबूत सुनवाई होगी तो जिला मुख्यालय तक फरियादियों की भीड़ घटेगी; और यदि हर शिकायत का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हुआ, तो प्रार्थना पत्रों का अंबार व्यवस्था से सवाल पूछता रहेगा।
