
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता की ख़ास रिपोर्ट। न्यूज़ नेटवर्क
पडरौना नगर के नौका टोला स्थित पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय परिसर में स्थापित वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा आज बदहाली, उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता की ऐसी दर्दनाक कहानी बयां कर रही है, जिसे देखकर हर देशभक्त का सिर शर्म से झुक जाए। कभी लाखों रुपये खर्च कर नगर की शान बनाने के लिए लाई गई यह प्रतिमा आज टूट-फूट, गंदगी और लापरवाही के बीच दम तोड़ती नजर आ रही है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर मूकदर्शक बने बैठे हैं।
प्रतिमा का रंग पूरी तरह उखड़ चुका है। अश्व का पिछला पैर क्षतिग्रस्त होकर टूटने की कगार पर पहुंच गया है और उसमें से लोहे का ढांचा बाहर झांक रहा है, मानो व्यवस्था की पोल खोल रहा हो। हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि प्रतिमा के आसपास गंदगी का अंबार लगा रहता है और स्थल को अवैध वाहन पार्किंग अड्डे में तब्दील कर दिया गया है। देश की आन-बान-शान रही वीरांगना की प्रतिमा के साथ यह व्यवहार स्थानीय लोगों के आक्रोश को लगातार भड़का रहा है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रतिमा स्थल पर कोई पहचान पट्टिका तक नहीं लगाई गई है। यही कारण है कि कई लोग इस प्रतिमा को महाराणा प्रताप की प्रतिमा समझ रहे हैं, जबकि पीठ पर बंधे बालक दामोदर राव की आकृति साफ संकेत देती है कि यह झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा है। इतिहास की अमर वीरांगना आज पहचान के संकट से जूझ रही हैं और जिम्मेदार विभाग सिर्फ फाइलों में विकास का ढोल पीट रहा है।
उल्लेखनीय है कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम 1857 के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी। मात्र 29 वर्ष की आयु में 17 जून 1858 को ग्वालियर के निकट कोटा की सराय में वीरगति प्राप्त करने वाली इस महान वीरांगना की बहादुरी को ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज तक ने स्वीकार किया था। लेकिन विडंबना देखिए, जिस वीरांगना ने देश के सम्मान के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए, उसी की प्रतिमा आज सरकारी उपेक्षा का शिकार बनी खड़ी है।
स्थानीय निवासी एआईएम नेता अमीन अंसारी, अजित कुमार एवं तमाम सभासदों ने इसे राष्ट्र की धरोहर बताते हुए तत्काल जीर्णोद्धार की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों को रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा पढ़ाई जाती है, लेकिन उनकी प्रतिमा की यह दुर्दशा पूरे समाज और प्रशासन के लिए शर्मनाक है।
नगर के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रतिमा का तत्काल मरम्मत एवं रंग-रोगन कराया जाए, पहचान पट्टिका लगाई जाए, सुरक्षा रेलिंग एवं स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित हो तथा 19 नवंबर को रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर शासकीय माल्यार्पण कार्यक्रम आयोजित किया जाए। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन छेड़ा जाएगा और जिम्मेदारों की उदासीनता के खिलाफ सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक आवाज बुलंद की जाएगी।
