
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के दुदही ब्लॉक अंतर्गत अमवाखास गांव में पेयजल संकट अब केवल एक समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की जीती-जागती तस्वीर बन चुका है। गांव में करोड़ों की योजनाओं के दावे करने वाला सिस्टम यहां चार वर्षों से बंद पड़ी पानी की टंकी को चालू तक नहीं करा सका। नतीजा यह है कि ग्रामीण आज भी शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इसी जनसमस्या को लेकर गांव निवासी मोहन कुमार वर्मा उर्फ मोहन सिंह कुशवाहा ने अनिश्चितकालीन सत्याग्रह छेड़ दिया है।
मंगलवार को धरने का दूसरा दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर मिट्टी का घड़ा रखकर मोहन वर्मा प्रशासन को यह संदेश दे रहे हैं कि गांव की प्यास अब केवल पानी से नहीं, बल्कि जवाबदेही से बुझेगी। उनका कहना है कि जब तक गांव की बंद पड़ी पानी की टंकी चालू नहीं होती और हर घर तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरने की गूंज बढ़ने के बाद मंगलवार शाम करीब चार बजे दुदही विकास खंड अधिकारी कमलेश राव और ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि ललन गोंड मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने सत्याग्रही युवक से बातचीत की और जल विभाग के अधिकारियों को फोन कर जल्द समाधान के निर्देश भी दिए। लेकिन सवाल वही पुराना है—क्या सिर्फ फोन घुमाने से गांव की सूखी टोंटी में पानी आ जाएगा?
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार विभागीय अधिकारियों और प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन की बाल्टी भरकर जनता पर उड़ेल दी गई। चार साल बीत गए, मगर पानी की टंकी ऐसे खड़ी है जैसे किसी सरकारी योजना की समाधि हो। गांव के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
धरना स्थल पर भारी संख्या में ग्रामीण जुटे और मोहन वर्मा के आंदोलन को समर्थन दिया। गांव में चर्चा है कि यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो यह आंदोलन बड़ा रूप ले सकता है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय “हर घर जल” का सपना दिखाने वाले जनप्रतिनिधि अब गांव की प्यास पर मौन साधे बैठे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि अमवाखास गांव की सूखी टंकी पहले जागेगी या फिर प्रशासन की सोई संवेदनाएं। फिलहाल गांव का घड़ा खाली है… और जनता का सब्र भी।
