
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | 12 मई
कुशीनगर में करोड़ों पौधों के सहारे हरियाली का सपना दिखाने वाले विभाग अब खुद सवालों के घेरे में दिखाई देने लगे हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में मुख्य विकास अधिकारी वंदिता श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आयोजित “जिला वृक्षारोपण समिति”, “जिला पर्यावरण समिति”, “जिला गंगा समिति” एवं “जिला आर्द्रभूमि समिति” की समीक्षा बैठक में कई विभागों की लापरवाही और सुस्त कार्यशैली पर नाराजगी साफ झलकती दिखी।
बैठक में वर्ष 2025 के वृक्षारोपण महाभियान की समीक्षा हुई, जिसमें एक ही दिन में 39 लाख 72 हजार 500 पौधे रोपित किए जाने का दावा किया गया था। वन विभाग ने 10 लाख 49 हजार 600 पौधे लगाए थे, जबकि बाकी 23 विभागों ने मिलकर 29 लाख 22 हजार 900 पौधरोपण किए जाने की रिपोर्ट प्रस्तुत की। लेकिन सवाल यह उठने लगा है कि जिन पौधों की संख्या लाखों में बताई जा रही है, आखिर उनमें कितने वास्तव में धरातल पर जीवित हैं और कितने केवल फाइलों व पोर्टलों में हरे-भरे दिखाई दे रहे हैं?
समीक्षा के दौरान सबसे बड़ा झटका तब सामने आया जब यह पाया गया कि राजस्व विभाग अब तक जियो टैगिंग का कार्य पूरा नहीं कर सका है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई कि जब पौधों की लोकेशन ही स्पष्ट नहीं, तो उनकी सुरक्षा और अस्तित्व का दावा कितना मजबूत माना जाए? इस पर सीडीओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित विभाग को 18 मई 2026 तक हर हाल में जियो टैगिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए जनपद को आवंटित 39 लाख 29 हजार 187 पौधरोपण लक्ष्य की भी समीक्षा की गई। इसमें वन विभाग को 14 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया गया है, जबकि अन्य विभागों को 25 लाख 29 हजार 187 पौधरोपण का दायित्व सौंपा गया है। लेकिन बैठक का माहौल इस बात की ओर भी इशारा करता दिखा कि लक्ष्य तय करने की रफ्तार विभागों में तेज है, जबकि जमीन पर तैयारी अब भी अधूरी है।
मुख्य विकास अधिकारी ने विभागवार वृक्षारोपण कार्ययोजना, स्थल चयन सूची और गड्ढा खुदान कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए उन विभागों पर नाराजगी जताई जिन्होंने अब तक जरूरी सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराईं। निर्देश दिया गया कि 15 मई 2026 तक सभी सूचनाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं।
बैठक में “जिला पर्यावरण समिति”, “जिला गंगा समिति” एवं “जिला आर्द्रभूमि समिति” से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। ग्रीन चौपाल संचालन, जैव विविधता समिति गठन, जैव विविधता रजिस्टर तैयार करने, आर्द्रभूमि की प्रारंभिक अधिसूचना और बांसी नदी पुनरोद्धार कार्य की प्रगति की समीक्षा की गई।
हालांकि बैठक में योजनाओं और लक्ष्यों की लंबी सूची जरूर दिखाई दी, लेकिन जनमानस के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि आखिर हर साल करोड़ों पौधे लगाने के दावों के बावजूद गर्मी बढ़ती क्यों जा रही है, नदियां सूखती क्यों जा रही हैं और हरियाली का असर जमीन पर दिखाई क्यों नहीं देता? कहीं ऐसा तो नहीं कि पौधरोपण अब पर्यावरण से ज्यादा “फोटो अभियान” बनता जा रहा है?
