


विलेज फास्ट टाइम्स गोरखपुर न्यूज़ नेटवर्क
गोरखपुर। स्मार्ट सिटी, डिजिटल इंडिया और घर-घर बिजली पहुंचाने के सरकारी दावों के बीच गोरखपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 54 उर्वरक नगर भगवानपुर चौहान टोला का एक हिस्सा आज भी बदहाल व्यवस्था का दर्द झेल रहा है। यहां केबीएस यूनिक स्कूल मार्ग पर करीब 15 परिवार वर्षों से बिजली विभाग की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं। हालात इतने भयावह हैं कि लोग बिजली के पोल के अभाव में बाँस-बल्ली के सहारे लगभग 300 मीटर दूर से तार खींचकर अपने घरों में रोशनी पहुंचाने को मजबूर हैं।
बरसात और तेज आंधी के इस मौसम में यह जुगाड़ू व्यवस्था किसी बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देती दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बाँस टूटकर बिजली के तार जमीन पर गिर चुके हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी शायद किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं। मोहल्ले के लोग रोज जान हथेली पर रखकर उन लटकते तारों के नीचे से गुजरते हैं। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग हर पल भय के साये में जीने को मजबूर हैं।
समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय ने इस पूरी व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि जब सभी घरों में वैध बिजली कनेक्शन हैं और उपभोक्ता समय से बिल जमा कर रहे हैं, तो आखिर बिजली विभाग पोल लगाने से क्यों भाग रहा है? उन्होंने कहा कि सरकार गांव-गांव और घर-घर बिजली पहुंचाने के बड़े-बड़े विज्ञापन देती है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जनता आज भी बाँस-बल्ली के सहारे अपनी जिंदगी रोशन करने को मजबूर है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “सरकार रोशनी देने की बात करती है, लेकिन यहां तो मौत के तारों से लोगों का भविष्य बांधा जा रहा है।” उनका कहना है कि सिर्फ चार से पांच बिजली पोल लगाकर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकता है, लेकिन विभागीय फाइलें शायद जनता की सुरक्षा से ज्यादा भारी हो चुकी हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी मांग उठाई कि क्षेत्र में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाई जाए ताकि अंधेरे और दुर्घटना दोनों से राहत मिल सके। उनका आरोप है कि कई बार शिकायतों और मौखिक अनुरोधों के बावजूद बिजली विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचने तक की जहमत नहीं उठाते।
समाजसेवी कुलदीप पाण्डेय ने मुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री, बिजली विभाग गोरखपुर, एसडीओ मोहद्दीपुर, स्थानीय पार्षद तथा संबंधित जेई समेत तमाम अधिकारियों को विज्ञप्ति भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि विभाग क्षेत्र का सर्वे कर पोलों की संख्या तय करे और अविलंब उन्हें लगवाए, अन्यथा किसी दिन यह लापरवाही बड़ी जनहानि का कारण बन सकती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जनता की जान से खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा? क्या बिजली विभाग किसी दर्दनाक हादसे के बाद ही जागेगा? या फिर सरकारी दावों की चमक के पीछे ऐसे ही मोहल्ले अंधेरे और खतरे में जीते रहेंगे?
