
नियमों को दफन कर बांटी गई नौकरियां! कुशीनगर स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग का बड़ा खेल बेनकाब
सीएमओ ऑफिस बना ‘नौकरी मंडी’? कागजों में भर्ती, अस्पतालों में तैनाती, 24 कर्मियों पर गिरी कार्रवाई की गाज
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों इलाज से ज्यादा “नौकरी प्रबंधन” को लेकर चर्चा में है। सरकारी अस्पतालों में मरीज दवा, डॉक्टर और व्यवस्था के लिए परेशान रहे, लेकिन विभागीय गलियारों में आउटसोर्सिंग के नाम पर नौकरी बांटने का ऐसा खेल चलता रहा, जिसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जिलाधिकारी स्तर की जांच में जब फाइलों की परतें खुलीं तो स्वास्थ्य विभाग का अंदरूनी तंत्र कटघरे में दिखाई देने लगा है।
मामला फ्रंट लाइन सिक्योरिटी एंड मैन पावर सर्विसेज एजेंसी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसके माध्यम से सफाईकर्मी और सपोर्ट स्टाफ की भर्ती की गई। आरोप है कि इस प्रक्रिया में शासन की निर्धारित गाइडलाइन, चयन मानक और रेंडमाइजेशन जैसी आवश्यक प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया। जिन नियमों को निष्पक्ष भर्ती का आधार माना जाता है, वे कागजों से गायब मिले।

सूत्रों के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम उस दौर का है जब स्वास्थ्य विभाग नेतृत्व परिवर्तन और प्रशासनिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा था। तत्कालीन सीएमओ डॉ. अनुपम प्रकाश भास्कर के निधन के बाद विभागीय जिम्मेदारी कार्यवाहक व्यवस्था में संचालित हो रही थी। इसी बीच आउटसोर्सिंग के सहारे भर्ती का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जिसमें पारदर्शिता से ज्यादा “सेटिंग और सिफारिश” की चर्चा होती रही।
बताया जाता है कि बिना स्पष्ट चयन प्रक्रिया, बिना पूर्ण दस्तावेजी आधार और बिना समुचित प्रशासनिक अनुमोदन के कई लोगों की तैनाती अस्पतालों में कर दी गई। मामला जब जिलाधिकारी तक पहुंचा तो जांच समिति गठित की गई। मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में बनी टीम ने जब रिकॉर्ड खंगाले तो भर्ती प्रक्रिया में कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं। कहीं चयन से जुड़े अभिलेख अधूरे मिले, कहीं प्रक्रिया से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले और कई बिंदुओं पर नियमों की अनदेखी के संकेत सामने आए।
जांच रिपोर्ट के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए 24 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। लेकिन कार्रवाई के बाद अब कई बड़े सवाल उठ रहे हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण थी तो इतने समय तक वेतन भुगतान कैसे होता रहा? किस स्तर पर निगरानी की कमी रही? और किन जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों की भूमिका की जांच होगी?
दिलचस्प बात यह भी है कि इससे पहले भी विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर कार्रवाई हो चुकी है। कुछ माह पूर्व भी कर्मचारियों को हटाए जाने की चर्चा रही थी। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग व्यवस्था प्रशासनिक सुविधा से आगे बढ़कर प्रभाव, पहुंच और पसंद की व्यवस्था में बदलती जा रही है?
जिले में अब चर्चा इस बात की है कि यह कार्रवाई केवल निचले स्तर तक सीमित रहेगी या फिर उन जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसियों तक भी पहुंचेगी जिन्होंने सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा कर दिया। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की यह कहानी जिले में चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।
