

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर की धरती पर मंगलवार को विकास, राजनीति, उम्मीद और दावों का ऐसा मंच सजा, जहां आंकड़ों की चमक भी दिखी और भविष्य के सपनों की तस्वीर भी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तमकुहीराज एवं फाजिलनगर में आयोजित कार्यक्रम में 424.41 करोड़ रुपये की 278 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर जिले को बड़ी सौगात देने का दावा किया। मंच से विकास की गूंज उठी, लेकिन जनता के मन में वही पुराना सवाल भी तैरता रहा—क्या इस बार योजनाएं शिलापट्टों से निकलकर जमीन तक पहुंचेंगी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विकास, सुशासन और जनकल्याण के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गांव, गरीब, किसान, महिला, नौजवान और वंचितों के जीवन में बदलाव लाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कानून व्यवस्था में सुधार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर को केवल एक जिला नहीं बल्कि इतिहास, अध्यात्म और संभावनाओं की धरती बताया। उन्होंने कहा कि यह भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की नगरी है और भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली भी। उन्होंने पूर्व की सरकारों पर परोक्ष हमला बोलते हुए कहा कि पहले पूर्वांचल की उपेक्षा होती थी, लेकिन अब “डबल इंजन सरकार” विकास की नई इबारत लिख रही है।
कार्यक्रम का सबसे चर्चित पहलू रहा निर्माणाधीन महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय। मुख्यमंत्री ने इसे किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और युवाओं के लिए आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार का केंद्र बताया। दावा किया गया कि इससे किसानों को नई तकनीक मिलेगी, कृषि उत्पादन बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सवाल यह भी उठता है कि जिस पूर्वांचल के युवा वर्षों से नौकरी की तलाश में महानगरों की धूल फांकते रहे, क्या अब उन्हें अपने ही क्षेत्र में अवसर मिलेंगे?
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है, निवेश आया है और रोजगार के नए रास्ते खुले हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि बिना किसी भेदभाव के हर पात्र व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचे। यह बयान तालियों के बीच जरूर गूंजा, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बैठे वे लोग भी इस घोषणा को अपने अनुभवों की कसौटी पर तौलते नजर आए, जो अब भी योजनाओं की फाइलों और कार्यालयी चक्करों से जूझते हैं।
मुख्यमंत्री ने कुशीनगर की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि जिले में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा संचालित है, मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुका है और लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत से कृषि विश्वविद्यालय निर्माणाधीन है। सरकार का दावा है कि इससे कुशीनगर को विकास, कृषि शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के नए केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी।
जनकल्याणकारी योजनाओं का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले के करीब 9 लाख नागरिक आयुष्मान भारत योजना का लाभ पा रहे हैं। किसानों को किसान सम्मान निधि मिल रही है और हजारों परिवारों को प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजनाओं के तहत पक्के घर दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि वंचित और मुसहर समाज के लिए जिले में लगभग 90 हजार आवासों का निर्माण कराया गया है।
विकास परियोजनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो तमकुहीराज, फाजिलनगर, सेवरही और दुदही क्षेत्र परियोजनाओं की बड़ी सूची में शामिल रहे। कुल 91 परियोजनाओं का लोकार्पण और 187 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया कि सभी परियोजनाएं गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरी हों, ताकि जनता को शीघ्र लाभ मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण किया और लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र एवं सहायता सामग्री वितरित की। मंच पर प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह, सांसद रविकिशन शुक्ला, सांसद शशांक मणि त्रिपाठी, विधायक डॉ. असीम कुमार राय सहित कई जनप्रतिनिधि, जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर, पुलिस अधीक्षक केशव कुमार तथा बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
अब जनता की नजर भाषणों की तालियों पर नहीं, बल्कि उन सड़कों पर है जो बननी हैं, उन युवाओं पर है जिन्हें रोजगार चाहिए, उन किसानों पर है जिन्हें तकनीक और बेहतर आमदनी चाहिए। क्योंकि विकास का असली चेहरा मंच की घोषणाओं से नहीं, बल्कि गांव की टूटी सड़क, किसान की मुस्कान और बेरोजगार युवा के हाथ में मिले अवसर से पहचाना जाता है।
कुशीनगर को 424 करोड़ की सौगात मिल गई है, अब इंतजार इस बात का है कि यह सौगात कागजों, भाषणों और शिलान्यास पट्टिकाओं से निकलकर जनता की जिंदगी में कब और कितनी मजबूती से दिखाई देती है।
