
मौत के बाद बढ़ी हलचल ने खड़े किए कई सवाल, इंसाफ की मांग पर अड़े परिजन
06 जून | विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के कसया कस्बे में संचालित लूना अस्पताल में पथरी के ऑपरेशन के बाद हुई नर्गिस की मौत का मामला अब केवल एक चिकित्सकीय घटना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र में चर्चा और सवालों का विषय बन चुका है। एक तरफ मृतका के परिजन न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग पर अडिग हैं, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन की मौत के बाद बढ़ी सक्रियता को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी सामने आ रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन घटना के बाद की परिस्थितियों ने कई गंभीर प्रश्न जरूर खड़े कर दिए हैं।
परिजनों का आरोप है कि नर्गिस की मौत के बाद अस्पताल प्रशासन का पूरा ध्यान इलाज से जुड़े सवालों के जवाब देने के बजाय मामले को शांत कराने और विवाद को आगे बढ़ने से रोकने पर केंद्रित दिखाई दिया। परिवार का दावा है कि विभिन्न स्तरों पर बातचीत, समझौते और मामले को रफा-दफा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। यदि इन आरोपों में जरा भी सच्चाई है तो यह केवल एक परिवार के साथ अन्याय नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी बड़ा सवाल होगा।

घटना के बाद अस्पताल परिसर और कसया क्षेत्र में लगातार चर्चाओं का दौर जारी है। स्थानीय लोगों के बीच भी यह सवाल गूंज रहा है कि आखिर एक सामान्य बताए गए ऑपरेशन के बाद मरीज की मौत कैसे हो गई? यदि उपचार पूरी तरह मानकों के अनुरूप था तो फिर अस्पताल प्रबंधन को जांच से डर किस बात का होना चाहिए? यही सवाल अब जनमानस के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।
जानकारों का कहना है कि गाल ब्लैडर में पथरी का ऑपरेशन सामान्य शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं में गिना जाता है। ऐसे में ऑपरेशन के बाद मरीज की मृत्यु होना स्वाभाविक रूप से कई चिकित्सकीय पहलुओं की जांच की मांग करता है। यह तय करना जरूरी है कि मृत्यु किसी अप्रत्याशित चिकित्सकीय जटिलता के कारण हुई या फिर उपचार प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही हुई। इसका उत्तर केवल निष्पक्ष और तकनीकी जांच ही दे सकती है।
मृतका के परिजनों का कहना है कि उन्हें केवल न्याय चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों ने पूरी जिम्मेदारी और मानकों के अनुरूप उपचार किया है तो जांच में सच्चाई स्वतः सामने आ जाएगी। लेकिन यदि कहीं कोई चूक हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

फ्लैश बैक: ऑपरेशन के बाद कैसे बुझ गई नर्गिस की जिंदगी
जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद कसया के वार्ड संख्या-4 निवासी नर्गिस पत्नी तसलीम गाल ब्लैडर में पथरी की समस्या से पीड़ित थीं। परिजनों ने बेहतर इलाज की उम्मीद में उन्हें कसया स्थित लूना अस्पताल में भर्ती कराया था। परिवार का आरोप है कि चिकित्सकों ने ऑपरेशन को सामान्य बताते हुए जल्द स्वस्थ होने का भरोसा दिया था।
परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के बाद नर्गिस की तबीयत बिगड़ने लगी। आरोप है कि हालत गंभीर होने के बावजूद समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही किसी बड़े चिकित्सा संस्थान के लिए तत्काल रेफर किया गया। इसी दौरान उपचार के क्रम में नर्गिस की मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और देखते ही देखते अस्पताल परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगी।
प्रशासनिक जांच पर टिकी निगाहें
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जांच को किस गंभीरता से लेते हैं। आम जनता की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगी या फिर हर पहलू की निष्पक्ष पड़ताल होगी। यदि चिकित्सकीय लापरवाही हुई है तो जिम्मेदारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और यदि आरोप निराधार हैं तो अस्पताल प्रबंधन को भी तथ्यात्मक रूप से क्लीन चिट मिलनी चाहिए।
फिलहाल नर्गिस की मौत के बाद उठे सवाल शांत होने के बजाय और गहरे होते जा रहे हैं। इंसाफ की मांग कर रहे परिजन पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जबकि क्षेत्र की जनता भी इस मामले की सच्चाई जानना चाहती है। आने वाले दिनों में प्रशासनिक और चिकित्सकीय जांच की दिशा ही तय करेगी कि नर्गिस की मौत महज एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी या फिर इसके पीछे ऐसी लापरवाहियां छिपी थीं जिन्हें उजागर किया जाना आवश्यक है। पूरे जनपद की नजर अब जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
