
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के विशुनपुरा थाना क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। क्षेत्र में उठ रही आवाजों और ग्रामीणों की शिकायतों के अनुसार धरती का सीना चीरकर मिट्टी और खनिज संपदा का लगातार दोहन किया जा रहा है, जबकि पर्यावरणीय नियम-कायदों को मानो ताक पर रख दिया गया है। हैरानी की बात यह है कि जिन विभागों पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी है, वे भी इस पूरे मामले में मौन साधे दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि दिन हो या रात, भारी मशीनों की गड़गड़ाहट और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजें क्षेत्र में आम हो चुकी हैं। खेतों और हरियाली से घिरे इलाकों में कथित रूप से इस तरह खनन किया जा रहा है जैसे पर्यावरण संरक्षण की सारी किताबें केवल अलमारियों की शोभा बढ़ाने के लिए बनाई गई हों। सवाल यह है कि आखिर यह सब किसकी निगरानी में हो रहा है और क्यों हो रहा है?
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन केवल मिट्टी निकालने का मामला नहीं है, बल्कि यह पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ने वाला गंभीर खतरा है। जहां एक ओर सरकारें हरियाली बढ़ाने, जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के लालच के कारण धरती का प्राकृतिक स्वरूप ही बदलता जा रहा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाली पीढ़ियों को बंजर भूमि, घटते भूजल स्तर और पर्यावरणीय संकट की बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या खनन माफियाओं के आगे पूरा सिस्टम बेबस हो चुका है? क्या नियम केवल आम नागरिकों के लिए हैं? क्या सरकारी राजस्व को भी चूना लगाया जा रहा है? आखिर ऐसा कौन सा संरक्षण कवच है जिसके कारण कथित तौर पर अवैध खनन का यह खेल बेखौफ जारी है?
ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है कि शिकायतों के बावजूद यदि हालात नहीं बदलते तो जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। लोग पूछ रहे हैं कि जब पर्यावरण बचाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तब धरती को छलनी करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती?
अब जनता जवाब मांग रही है। यदि लगाए जा रहे आरोपों में सच्चाई है तो प्रशासन को तत्काल निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि कुशीनगर की धरती किसी की निजी जागीर नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। धरती बचेगी तभी पर्यावरण बचेगा, और पर्यावरण बचेगा तभी भविष्य सुरक्षित रहेगा।
