
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर में प्रस्तावित एनएच-730 (पडरौना-तमकुहीराज मार्ग) के चौड़ीकरण को लेकर जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए 67 प्रभावित गांवों में भूमि के क्रय-विक्रय पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस ले लिया है। अपर जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के बाद उन किसानों, भू-स्वामियों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी जमीनों पर पिछले कई सप्ताह से अनिश्चितता का साया मंडरा रहा था।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के चार लेन चौड़ीकरण के मद्देनजर तहसील पडरौना के 24 तथा तमकुहीराज के 43 गांवों समेत कुल 67 गांवों में भूमि खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। प्रशासन का तर्क था कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया प्रभावित न हो। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जिन गांवों में प्रतिबंध लगाया गया, वहां अब तक न तो भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 3A की अधिसूचना जारी हुई और न ही लेण्ड एक्विजिशन प्लान प्रस्तुत किया गया।
इसी आधार पर विभिन्न पक्षों द्वारा प्रशासन से प्रतिबंध हटाने की मांग की गई। मामले पर विचार करने के बाद प्रशासन ने माना कि बिना स्पष्ट अधिसूचना और अधिग्रहण योजना के लोगों के संपत्ति अधिकारों पर रोक उचित नहीं है। फलस्वरूप पूर्व में जारी प्रतिबंधात्मक आदेश वापस ले लिया गया।
हालांकि यह फैसला राहत जरूर लेकर आया है, लेकिन कई गंभीर सवाल भी छोड़ गया है। आखिर बिना अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी किए 67 गांवों के हजारों लोगों को असमंजस में क्यों रखा गया? जमीन की खरीद-बिक्री रोकने जैसा बड़ा निर्णय किन तथ्यों के आधार पर लिया गया था? और यदि अधिग्रहण की प्रक्रिया तैयार ही नहीं थी, तो जनता को अनावश्यक परेशानी में डालने की जिम्मेदारी किसकी है?
फिलहाल किसानों और भू-स्वामियों ने राहत की सांस ली है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह साफ नहीं है। लोगों की नजरें अब प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि आखिर चार लेन परियोजना कब शुरू होगी और प्रभावित परिवारों का भविष्य किस दिशा में जाएगा। प्रशासन के इस फैसले ने राहत तो दी है, मगर व्यवस्था की कार्यशैली पर कई कड़वे सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
