

विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता
तमकुहीराज, कुशीनगर। मध्य प्रदेश में 14 गौरक्षकों को आजीवन कारावास की सजा दिए जाने के विरोध में मंगलवार को तमकुहीराज तहसील परिसर में अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद एवं राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने उपजिलाधिकारी आकांक्षा मिश्रा के माध्यम से देश के गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए सजा को निरस्त कर सभी गौरक्षकों को तत्काल रिहा करने की मांग उठाई।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के गोरक्ष प्रांत अध्यक्ष रंजीत गुप्ता ने कहा कि सिवनी मालवा, मध्य प्रदेश के मामले में 14 गौरक्षकों को दी गई आजीवन कारावास की सजा न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि करोड़ों गौभक्तों की भावनाओं को आहत करने वाली भी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने गौ संरक्षण के लिए कार्य किया, उन्हें कथित रूप से फर्जी तरीके से मुकदमे में फंसाकर कठोर दंड दिया गया है।
ज्ञापन में मांग की गई कि मामले का पुनः परीक्षण कराया जाए तथा सभी दोषसिद्ध गौरक्षकों को क्षमादान देकर रिहा किया जाए। संगठन ने यह भी मांग उठाई कि इस प्रकरण से जुड़े न्यायिक निर्णय की उच्चस्तरीय समीक्षा हो और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार होने का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू समाज और गौभक्तों को सरकार से न्याय की अपेक्षा है। उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई तो अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल देशव्यापी आंदोलन छेड़ने को बाध्य होंगे।
राजनीतिक गलियारों में भी इस प्रदर्शन की चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि जिन संगठनों ने वर्षों से गौ संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया, उनकी मांगों पर सरकार क्या रुख अपनाती है। वहीं विरोध प्रदर्शन ने यह संकेत भी दे दिया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय बजरंग दल के जिलाध्यक्ष विनय यादव, जिला उपाध्यक्ष ज्वाला पटेल, ब्लॉक अध्यक्ष सुनील भारती, मधुसूदन चौहान, अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद के राजन सिंह, अर्पित राय, जय प्रकाश, अंकुश पटेल, पिंटू गुप्ता, धनंजय यादव, गोविंद निषाद, बाला जी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
तमकुहीराज तहसील में हुआ यह प्रदर्शन केवल ज्ञापन सौंपने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकार और प्रशासन तक नाराजगी का स्पष्ट संदेश पहुंचाने का प्रयास भी माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संगठन की मांगों पर शासन स्तर से कोई प्रतिक्रिया आती है या मामला राजनीतिक बहस का नया केंद्र बनता है।
