
विलेज फास्ट टाइम्स न्यूज नेटवर्क
विशेष संवाददाता, कुशीनगर
संदिग्ध मौत या सुनियोजित साजिश? पति की मौत के बाद पत्नी का बड़ा आरोप, बिना पोस्टमार्टम कर रातों-रात किया अंतिम संस्कार, न्याय के लिए एसपी की चौखट पर पहुंची पीड़िता
कुशीनगर। जिले के सेवरही थाना क्षेत्र के पिपरा अगरवा मुस्तकिल गांव से सामने आया एक मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। 30 वर्षीय वीरेंद्र कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उनकी पत्नी ने ससुराल पक्ष पर हत्या का गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता का आरोप है कि उसके पति की मौत के बाद न तो उसे सूचना दी गई और न ही कानूनन आवश्यक पोस्टमार्टम कराया गया। इसके बजाय परिजनों ने जल्दबाजी में सुबह करीब पांच बजे अंतिम संस्कार कर दिया, जिससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहरा गया है।
पीड़िता के अनुसार, 20 जून की देर रात वीरेंद्र कुशवाहा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई। उस समय वह अपने मायके में थी। आरोप है कि ससुराल पक्ष ने घटना की जानकारी उससे छिपाए रखी और अगले ही दिन सुबह बिना पत्नी को बुलाए, बिना पोस्टमार्टम कराए तथा बिना मामले की गहन जांच कराए अंतिम संस्कार कर दिया। जब तक उसे सूचना मिली, तब तक सब कुछ समाप्त हो चुका था।
बताया जा रहा है कि वीरेंद्र और उनकी पत्नी का विवाह जनवरी 2022 में हुआ था। दोनों का एक छोटा बेटा भी है। पति की अचानक हुई मौत और उसके बाद की घटनाओं ने पीड़िता को गहरे सदमे में डाल दिया है। उसका कहना है कि उसे पूरा विश्वास है कि उसके पति की मौत सामान्य नहीं, बल्कि संदिग्ध है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
पीड़िता का आरोप है कि उसने सेवरही थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। कार्रवाई न होने से निराश होकर उसने पुलिस अधीक्षक, कुशीनगर को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। उसका यह भी आरोप है कि न्याय दिलाने के बजाय उस पर दबाव बनाया जा रहा है।
मामले में जब सेवरही थाना प्रभारी उपनिरीक्षक से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इससे पीड़िता और उसके परिजनों की आशंकाएं और बढ़ गई हैं। अब यह मामला केवल एक संदिग्ध मौत का नहीं, बल्कि पुलिस की कार्यशैली और कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
यदि पीड़िता के आरोप सही हैं और बिना पोस्टमार्टम कराए अंतिम संस्कार किया गया है, तो यह जांच का अत्यंत गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष विवेचना और वैज्ञानिक साक्ष्य ही सच्चाई तक पहुंचने का सबसे बड़ा माध्यम होते हैं। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
महिला सुरक्षा और कानून के राज को लेकर सरकार की ओर से लगातार “जीरो टॉलरेंस” और सख्त कार्रवाई के दावे किए जाते रहे हैं। ऐसे में यदि किसी पीड़ित पक्ष की शिकायत पर समयबद्ध कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि पत्नी द्वारा लगाए गए हत्या और दबाव बनाने जैसे आरोप अभी आरोप हैं, जिनकी पुष्टि निष्पक्ष पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगी।
फिलहाल पूरा मामला पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में पहुंच चुका है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील प्रकरण में निष्पक्ष जांच कर पीड़िता को न्याय दिलाता है या नहीं। क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग निष्पक्ष कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
