
सरकारी धन से बना भवन किसके इंतजार में? बच्चों को योजनाओं का लाभ नहीं मिलने का आरोप, स्थलीय जांच की मांग
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर से विशेष संवाददाता।
कुशीनगर। सरकार बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शिक्षा, पोषण और विभिन्न निर्धारित सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती है। लेकिन कुशीनगर के विकासखंड दुदही अंतर्गत ग्राम सभा कुबेराभुआल पट्टी से सामने आया मामला इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र का भवन तैयार होने के बावजूद बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा-दीक्षा एवं निर्धारित सेवाओं का लाभ नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है।
सवाल सीधा है—जब भवन बनकर तैयार है तो बच्चों की पढ़ाई और सरकारी सेवाओं का संचालन आखिर क्यों नहीं? क्या सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल भवन निर्माण तक सीमित है, या फिर उस भवन में बच्चों की किलकारियां और शिक्षा की गतिविधियां भी सुनाई देनी चाहिए?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि केंद्र का भवन तैयार होने के बावजूद बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी केंद्र की सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। यदि यह स्थिति सही पाई जाती है तो मामला महज लापरवाही का नहीं, बल्कि बाल हित और सरकारी व्यवस्था की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यदि कागजों में केंद्र का संचालन नियमित दिखाया जा रहा हो और जमीन पर तस्वीर अलग हो, तो आखिर इसकी निगरानी कौन कर रहा है? रिपोर्टों में सब ठीक और गांव में व्यवस्था ठप—तो फिर सच किसे माना जाए?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले का निस्तारण केवल कागजी रिपोर्ट के आधार पर न किया जाए, बल्कि अधिकारियों की टीम द्वारा मौके पर स्थलीय जांच कराई जाए। जांच में आंगनबाड़ी भवन की वास्तविक स्थिति, बच्चों की उपस्थिति, कार्यकर्ता की नियमितता, संबंधित अभिलेखों तथा बच्चों को दी जा रही सेवाओं की बारीकी से पड़ताल की जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि भवन तैयार होने के बावजूद केंद्र का संचालन निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप क्यों नहीं हो रहा है। यदि जांच में किसी कर्मचारी या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही, अनियमितता अथवा निर्धारित दायित्वों का पालन न करना सामने आता है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और केंद्र का नियमित संचालन सुनिश्चित कराया जाए।
अब निगाहें संबंधित विभागीय अधिकारियों पर हैं। देखना होगा कि मामला फाइलों में घूमता है या गांव की धरती पर उतरकर जांच होती है। क्योंकि आंगनबाड़ी भवन बच्चों के भविष्य के लिए बना है—सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में उसकी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए नहीं।
बाल हित से जुड़े इस मामले में त्वरित जांच और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है, ताकि सरकारी योजना का वास्तविक लाभ उन बच्चों तक पहुंच सके, जिनके नाम पर यह व्यवस्था खड़ी की गई है।
