

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद कुशीनगर में कथित नेटवर्किंग कम्पनी की आड़ में नेपाली युवक-युवतियों को बंधक बनाकर काम कराने के सनसनीखेज मामले का पर्दाफाश होने से हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि बेहतर नौकरी, मोटी कमाई और सुनहरे भविष्य का सपना दिखाकर नेपाल से युवक-युवतियों को बुलाया गया, लेकिन यहां पहुंचने के बाद उनका जीवन कथित तौर पर कैद जैसा बना दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, कम्पनी में काम कर रहे नेपाली युवक-युवतियों से दिन-रात दबाव में काम लिया जा रहा था। बाहर निकलने, परिवार से खुलकर संपर्क करने और स्वतंत्र रूप से आने-जाने पर भी कथित रोक जैसी स्थिति बनी हुई थी। मामला नेपाल एम्बेसी तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई।
सूचना मिलते ही नेपाल एम्बेसी और कुशीनगर पुलिस हरकत में आई। संयुक्त स्तर पर की गई कार्रवाई में कथित कम्पनी परिसर पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की गई, जहां से कई नेपाली युवक-युवतियों को रेस्क्यू किए जाने की चर्चा तेज है। कार्रवाई के दौरान मौजूद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
कुल चार सौ तिरेपन नेपाली युवक-युवतियों को बंधक बनाकर नेटवर्किंग का खेल! नेपाल एम्बेसी और कुशीनगर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में बड़ा खुलासा किए गए युवक-युवतियों के चेहरे पर राहत तो दिखी, लेकिन उनके मन में बीते दिनों की कथित पीड़ा और भय साफ झलकता नजर आया। कई लोगों ने इशारों-इशारों में अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। वहीं, स्थानीय लोगों में भी इस पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। यदि जांच में मानव तस्करी, अवैध बंधन, धोखाधड़ी या अन्य आपराधिक तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रोजगार और नेटवर्किंग के नाम पर युवाओं को जाल में फंसाने वाले ऐसे कथित गिरोह कब तक मासूम सपनों का सौदा करते रहेंगे? फिलहाल, नेपाल एम्बेसी और कुशीनगर पुलिस की कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है, जबकि पूरे मामले पर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
