
कुशीनगर। (विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता)।
कुशीनगर की भूमि व्यवस्था से जुड़ा दशकों
पुराना एक बड़ा कानूनी विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पडरौना राजदरबार की सीलिंग खातेदार रानी रेवती देवी की 1,503.57 एकड़ अतिरिक्त सीलिंग भूमि अब राज्य सरकार में निहित कर दी गई है। करीब 44 वर्षों तक चले लंबे कानूनी संघर्ष के बाद सामने आए इस फैसले ने जिले की भूमि व्यवस्था में बड़े बदलाव का रास्ता खोल दिया है।
बताया जा रहा है कि यह विशाल भूमि क्षेत्र पडरौना, खड्डा, कसया और कप्तानगंज तहसीलों के 90 से अधिक गांवों में फैला हुआ है। नियमानुसार खातेदार के लिए 18.04 एकड़ सिंचित भूमि छोड़ते हुए शेष अतिरिक्त भूमि पर अब बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। यानी वर्षों से चले आ रहे इस विवाद के बाद सरकारी अभिलेखों में दर्ज अतिरिक्त भूमि को अब राज्य के नियंत्रण में लेकर उसके सार्वजनिक उपयोग की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इतनी बड़ी भूमि को केवल सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करके छोड़ देने के बजाय इसके जनहित में उपयोग की उम्मीद जगी है। प्रशासनिक स्तर पर इसके जरिए गरीब और भूमिहीन परिवारों को कृषि एवं आवासीय पट्टे दिए जाने के साथ-साथ विद्यालय, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन और अन्य जनकल्याणकारी संस्थानों के लिए भूमि उपलब्ध कराए जाने की संभावना है।
44 वर्षों के इस लंबे विवाद का पटाक्षेप इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामला सिर्फ जमीन के स्वामित्व का नहीं, बल्कि हजारों जरूरतमंद परिवारों के भविष्य और सार्वजनिक हित से जुड़ा हुआ है।
अब असली नजर इस बात पर होगी कि सरकार और जिला प्रशासन इस विशाल भूमि का उपयोग कितनी पारदर्शिता और तेजी से करते हैं। 1,503.57 एकड़ भूमि के सरकारी निहित होने के बाद अगला सवाल यही है—किसे मिलेगा पट्टा और कहां बनेगा जनहित का संस्थान? यही आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की सबसे बड़ी कसौटी होगी।
