
वेतन रुका, संवाद टूटा और फूटा गुस्सा; अब आर-पार की लड़ाई के मूड में अभियंता
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। सड़क, पुल और विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाला लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) इन दिनों अपने ही घर में उठे तूफान से जूझता दिखाई दे रहा है। विभागीय गलियारों में विकास की योजनाओं से ज्यादा चर्चा कर्मचारियों और अभियंताओं के आंदोलन की हो रही है। सोमवार को निर्माण खंड कार्यालय में डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ ने अधिशासी अभियंता राजेश निगम के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे पूरे विभाग में हलचल मच गई।
संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय अधिशासी अभियंता की कार्यशैली लगातार टकराव पैदा कर रही है। कर्मचारियों का कहना है कि कार्यालय में संवाद की जगह दबाव और भय का वातावरण बनाया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
धरना शुरू, लेकिन वार्ता से दूरी
आंदोलनकारी अभियंताओं का आरोप है कि मुख्य अभियंता, गोरखपुर क्षेत्र द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद अधिशासी अभियंता कर्मचारियों से वार्ता करने नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं, संघ का दावा है कि आंदोलन शुरू होने के दौरान ही वह बिना अनुमति मुख्यालय छोड़कर चले गए। इस घटना ने कर्मचारियों के आक्रोश को और भड़का दिया।
संघ नेताओं का कहना है कि यदि अधिकारी संवाद से ही दूरी बना लें तो समस्याओं का समाधान आखिर कैसे होगा? सवाल यह भी उठ रहा है कि जब विभाग के भीतर असंतोष चरम पर हो, तब जिम्मेदार अधिकारी की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
पांच अभियंताओं का वेतन रोके जाने का आरोप
विवाद की सबसे बड़ी वजह पांच अभियंताओं का मई माह का वेतन रोके जाने को बताया जा रहा है। संघ का आरोप है कि बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के वेतन रोक दिया गया, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन किसी अधिकारी की कृपा नहीं बल्कि उनका वैधानिक अधिकार है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस निर्णय ने कर्मचारियों के बीच असंतोष की आग में घी डालने का काम किया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि कोई प्रशासनिक कारण था तो उसकी पारदर्शी जानकारी कर्मचारियों को क्यों नहीं दी गई?
कार्यालय में काम कम, खौफ ज्यादा?
संघ पदाधिकारियों का आरोप है कि कार्यालय में आए दिन नोटिस, स्पष्टीकरण और कार्रवाई की चेतावनियों का माहौल बना रहता है। उनका कहना है कि कई कर्मचारी अपनी बात रखने से भी हिचकने लगे हैं। कर्मचारियों का दावा है कि कार्यालय का वातावरण स्वस्थ और सकारात्मक होने के बजाय तनावपूर्ण होता जा रहा है।
मुख्य अभियंता के निर्देशों की अनदेखी?
आंदोलन के बीच सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह खड़ा हो गया है कि यदि मुख्य अभियंता द्वारा वार्ता कर विवाद सुलझाने का निर्देश दिया गया था, तो उसका पालन क्यों नहीं हुआ? विभागीय चर्चाओं में यह मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है। कर्मचारी यह भी पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा कौन-सा भरोसा या संरक्षण है जिसके कारण वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश भी प्रभावहीन दिखाई दे रहे हैं।
अब सम्मान और अधिकार की लड़ाई
संघ भवन में आयोजित बैठक में अभियंताओं ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल वेतन या आदेशों का नहीं, बल्कि सम्मान और कार्यस्थल की गरिमा का मुद्दा बन चुका है। संघ ने पांच अभियंताओं का रोका गया वेतन तत्काल जारी करने, जनपद सचिव इं. संजीव कुमार श्रीवास्तव के संबंध में जारी आदेश लागू करने तथा कार्यालय में भयमुक्त एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है।
फिलहाल पीडब्ल्यूडी का यह विवाद केवल कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच का मतभेद नहीं रह गया है। जब कर्मचारी धरने पर हों, वेतन विवाद चर्चा में हो, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर सवाल उठ रहे हों और विभागीय माहौल आरोप-प्रत्यारोप से गर्म हो, तब यह मामला सीधे प्रशासनिक जवाबदेही और नेतृत्व क्षमता की परीक्षा बन जाता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय प्रशासन इस बढ़ते विवाद का समाधान संवाद से करता है या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।
