
कुशीनगर में पथरी के ऑपरेशन के बाद युवक की मौत, निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर | विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद के रविंद्रनगर थाना क्षेत्र स्थित साँकृत्य हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक युवक की मौत ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद युवक लगातार असहनीय दर्द से तड़पता रहा, लेकिन हर बार उसकी शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय केवल ड्रिप और दवाइयों के सहारे वापस घर भेज दिया गया। रविवार देर रात इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा हुआ, परिजनों और स्थानीय लोगों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की।
मृतक के परिजनों के अनुसार लगभग दस दिन पहले युवक का साँकृत्य हॉस्पिटल में पथरी का ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने प्रक्रिया सफल बताते हुए उसे घर भेज दिया। शुरुआत में परिवार ने राहत की सांस ली, लेकिन महज तीन दिन बाद युवक के पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। दर्द धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि वह सामान्य रूप से उठ-बैठ भी नहीं पा रहा था। परिवार बार-बार उसे अस्पताल लेकर पहुंचा, लेकिन आरोप है कि हर बार केवल ड्रिप चढ़ाकर और दवाइयां देकर घर भेज दिया गया।
परिजनों का कहना है कि युवक लगातार डॉक्टरों से अपनी तकलीफ बताता रहा, लेकिन उसकी स्थिति की गंभीर जांच नहीं कराई गई। न तो किसी विशेषज्ञ से परामर्श कराया गया और न ही किसी उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया। उनका आरोप है कि यदि समय रहते उचित जांच और इलाज होता, तो शायद आज युवक जीवित होता। परिवार का कहना है कि इलाज के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई गई, जबकि मरीज दर्द से कराहता रहा।
रविवार रात अचानक युवक की हालत और बिगड़ गई। तेज दर्द और बेचैनी के बीच परिजन उसे एक बार फिर अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में उपचार शुरू हुआ, लेकिन कुछ ही देर बाद युवक ने दम तोड़ दिया। मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अस्पताल पहुंच गए। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया।
गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने दोषी चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। इस दौरान भीड़ और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की भी स्थिति बनी। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने माहौल शांत कराया और मामले की जानकारी जुटाई।
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में कई सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं। यदि ऑपरेशन सफल था तो मरीज की हालत लगातार क्यों बिगड़ती रही? बार-बार दर्द की शिकायत के बावजूद आवश्यक जांच क्यों नहीं कराई गई? मरीज को समय रहते किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर क्यों नहीं किया गया? आखिर ऐसी कौन-सी चिकित्सकीय या अन्य परिस्थितियां थीं, जिनके चलते ऑपरेशन के कुछ ही दिनों बाद युवक की जान चली गई? इन सभी सवालों के जवाब अब स्वास्थ्य विभाग और जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।
फिलहाल परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे मामलों में निष्पक्ष चिकित्सकीय और प्रशासनिक जांच बेहद आवश्यक है ताकि मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
गौरतलब है कि कुछ समय पहले कसया क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में भी पथरी के ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत का मामला सामने आया था। उस घटना में भी परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए थे और अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन हुआ था। उस प्रकरण की जांच शुरू होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन अब तक उसके अंतिम निष्कर्ष और कार्रवाई को लेकर सवाल बने हुए हैं।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं। यदि मरीजों और उनके परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं बल्कि निजी स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही का बड़ा मुद्दा है। वहीं यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही नहीं मिलती, तो वास्तविक कारणों को भी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि अफवाहों की जगह तथ्यों को महत्व मिले।
अब पूरे जिले की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या इस मामले में किसी की लापरवाही थी। निष्पक्ष जांच ही इस घटना की सच्चाई सामने ला सकती है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा तय करेगी।
