

दुदही ब्लॉक गेट पर मटकी रख युवक के सत्याग्रह ने झुकाया सिस्टम, तीसरे दिन चालू हुई पानी की टंकी
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के दुदही ब्लॉक अंतर्गत ग्राम अमवाखास में चार वर्षों से बंद पड़ी पानी की टंकी को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन सत्याग्रह आखिरकार बुधवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया। तीन दिनों तक चले इस आंदोलन ने न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि जब जनता अपने अधिकारों के लिए डट जाती है, तो सुस्त सिस्टम को भी घुटने टेकने पड़ते हैं।
ग्राम अमवाखास में ओवरहेड पानी की टंकी वर्षों से बंद पड़ी थी। हालत यह थी कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा था। गर्मी के इस भीषण मौसम में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान थे, लेकिन जिम्मेदार विभाग मानो गहरी नींद में सोया हुआ था। कई बार शिकायतें हुईं, अधिकारियों के चक्कर लगाए गए, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।
आखिरकार गांव के युवक मोहन कुमार वर्मा उर्फ मोहन सिंह कुशवाहा ने मोर्चा संभाला और दुदही ब्लॉक गेट के सामने मिट्टी का घड़ा रख शांतिपूर्ण सत्याग्रह शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह आंदोलन क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। ग्रामीणों का समर्थन बढ़ता गया और प्रशासन पर दबाव बनना शुरू हो गया।
सत्याग्रह के तीसरे दिन बुधवार को तमकुहीराज तहसीलदार महेश कुमार धरना स्थल पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारी युवक से बातचीत कर उसकी मांगों को जायज बताया और समस्या के तत्काल समाधान का भरोसा दिलाया। हालांकि मोहन सिंह अपने संकल्प पर अडिग रहे और स्पष्ट कहा कि “जब तक पानी टंकी चालू नहीं होगी, आंदोलन खत्म नहीं होगा।”
इसके बाद प्रशासन हरकत में आया। जल निगम के जूनियर इंजीनियर रत्न पाल को तत्काल मौके पर बुलाया गया। तहसीलदार और जल निगम की टीम की मौजूदगी में बंद पड़ी टंकी को चालू कराया गया। जैसे ही टंकी से पानी की सप्लाई शुरू हुई, पूरे गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के चेहरों पर राहत साफ दिखाई दी।
सत्याग्रही मोहन कुमार वर्मा ने कहा कि चार वर्षों से ग्रामीण मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने और पानी आपूर्ति बहाल होने के बाद ही उन्होंने सत्याग्रह समाप्त करने का निर्णय लिया।
धरना समाप्त होने के बाद ग्रामीणों ने आंदोलनकारी युवक का स्वागत किया और प्रशासन का आभार जताया। वहीं कई ग्रामीणों ने कटाक्ष करते हुए कहा कि “अगर सिस्टम पहले जाग जाता, तो जनता को सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आती।” पूरे क्षेत्र में दिनभर यह मामला चर्चा का केंद्र बना रहा।
