

कुशीनगर। दुदही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह बनी एक मरीज की मौत के बाद अस्पताल परिसर में हुआ जबरदस्त हंगामा, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार चाफ गांव निवासी 58 वर्षीय योगेन्द्र कुशवाहा की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें दुदही सीएचसी लाया गया। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब मरीज की जान संकट में थी, तब उसे ले जाने के लिए तत्काल एम्बुलेंस क्यों उपलब्ध नहीं हो सकी?
बताया जा रहा है कि परिजन निजी वाहन की व्यवस्था करने में जुटे थे, लेकिन इसी बीच मरीज ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही माहौल गरमा गया और देखते ही देखते अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में तब्दील हो गया।
आरोप है कि आक्रोशित परिजनों ने डॉक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मारपीट की। अस्पताल में मौजूद सीसीटीवी कैमरों में भी हंगामे और कथित मारपीट की तस्वीरें कैद होने की बात सामने आ रही है। यही नहीं, बीच-बचाव करने पहुंचे स्थानीय युवक राजन को भी पीटे जाने की चर्चा है।
घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी सुरक्षित हैं? यदि डॉक्टर ही भय के माहौल में काम करेंगे तो मरीजों को बेहतर इलाज कैसे मिलेगा? वहीं दूसरी ओर परिजनों का दर्द भी कम नहीं है, जो समय पर संसाधन और व्यवस्था न मिलने को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
घटना के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से आकस्मिक ड्यूटी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है।
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। आखिर मरीज की मौत का जिम्मेदार कौन है—व्यवस्था की कमी, संसाधनों का अभाव या फिर हालात से उपजा गुस्सा?
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