
हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बीच कार्रवाई का दावा, महंत ने थाने में दी तहरीर; पुलिस बोली—मामले में की जा रही आवश्यक कार्रवाई
कुशीनगर। विशेष संवाददाता। कुशीनगर जनपद के तरयासुजान थाना क्षेत्र स्थित डुमरिया मठ में विवादित भूमि को लेकर एक नया और गंभीर विवाद सामने आया है। मठ पक्ष ने आरोप लगाया है कि रात के अंधेरे में ट्रैक्टर और जेसीबी मशीन का सहारा लेकर समाधि स्थल के समीप वर्षों पुराने पीपल और बरगद के वृक्षों को गिराने अथवा क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया। मठ पक्ष का कहना है कि यह मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि समाधि स्थल और उससे जुड़ी सनातन धार्मिक आस्था को प्रभावित करने का गंभीर प्रयास है।
डुमरिया मठ के उत्तराधिकारी महंत रूद्रानंद गिरि के अनुसार, उनके पूर्वज गुरु की समाधि स्थल पर लंबे समय से पीपल और बरगद के पुराने वृक्ष मौजूद हैं। मठ और श्रद्धालुओं के लिए इन वृक्षों का विशेष धार्मिक महत्व है। सनातन परंपरा में पीपल और बरगद को आस्था, श्रद्धा और धार्मिक विश्वास का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में मठ पक्ष ने इन पेड़ों को कथित रूप से मशीनों से नुकसान पहुंचाने के प्रयास पर गहरी आपत्ति जताई है।

महंत रूद्रानंद गिरि ने आरोप लगाया कि विपक्षी पक्ष से जुड़े संजीव गुप्ता निवासी सेवरही के चालक प्रकाश द्वारा रात के समय ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। मठ पक्ष का कहना है कि यदि मशीनों की कार्रवाई आगे बढ़ती तो गुरु की समाधि स्थल को भी नुकसान पहुंच सकता था। इसी आशंका के चलते मामले की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई।
मठ पक्ष का दावा है कि संबंधित भूमि का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और इस संबंध में हाईकोर्ट से स्थगन आदेश भी प्रभावी है। ऐसे में न्यायालयी विवाद लंबित होने के बावजूद कथित रूप से जेसीबी और ट्रैक्टर लगाकर मौके की स्थिति बदलने अथवा धार्मिक स्थल से जुड़े वृक्षों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कई गंभीर सवाल खड़े करती है। मठ पक्ष ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
बताया गया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस रात में मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद गुरुवार को मठ पक्ष ने तरयासुजान थाने में लिखित तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि भूमि विवाद का फैसला न्यायालय के माध्यम से होना चाहिए, लेकिन किसी भी पक्ष को कानून अपने हाथ में लेकर धार्मिक स्थल अथवा आस्था से जुड़े प्रतीकों को नुकसान पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
थानाध्यक्ष बोले—मामले में होगी आवश्यक कार्रवाई
इस संबंध में तरयासुजान थानाध्यक्ष नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि घटना की सूचना प्राप्त हुई है। मामले में आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
अब सबकी निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि डुमरिया मठ के समाधि स्थल और आस्था से जुड़े पीपल-बरगद को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में जांच के बाद क्या कार्रवाई सामने आती है।
— विलेज फास्ट टाइम्स, कुशीनगर
विशेष संवाददाता
