
29 अगस्त | विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कप्तानगंज। इलाज के नाम पर संचालित निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। कप्तानगंज स्थित सचितानंद हॉस्पिटल में चार दिन की नवजात बच्ची की मौत के मामले ने स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के लिए मजबूर कर दिया है। मामला सामने आने के बाद गठित जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालक को कारण बताओ नोटिस थमा दिया गया है।
जानकारी के अनुसार ग्राम अमडरिया निवासी अश्वनी कुमार मिश्रा पुत्र सदानन्द मिश्रा की चार दिवसीय नवजात बच्ची की 24 अगस्त 2026 को उक्त अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। घटना को लेकर उठे सवालों के बाद
जिलाधिकारी/अध्यक्ष जिला रजिस्ट्रिकरण प्राधिकरण एवं अध्यक्ष जिला स्वास्थ्य समिति के स्तर से जांच टीम गठित की गई। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन से जवाब-तलब किया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी चन्द्र प्रकाश के अनुसार अस्पताल संचालक को नोटिस तामील कराते हुए सात दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण तथा संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अब निगाहें अस्पताल प्रबंधन के जवाब पर टिकी हैं कि आखिर नवजात की मौत के मामले में परिस्थितियां क्या थीं और अस्पताल में उपचार से संबंधित निर्धारित मानकों का पालन किस स्तर तक हुआ।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने साफ संकेत दे दिया है कि मामला केवल नोटिस देकर फाइल बंद करने तक सीमित नहीं रहेगा। निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला अथवा अस्पताल की ओर से प्रस्तुत स्पष्टीकरण और दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए तो हॉस्पिटल का पंजीकरण निरस्त करने सहित अन्य वैधानिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम निजी अस्पतालों के लिए भी सीधा संदेश माना जा रहा है—मरीज कोई आंकड़ा नहीं और अस्पताल केवल कमाई का केंद्र नहीं हो सकता। स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का खामियाजा सीधे मरीज और उनके परिवार को भुगतना पड़ता है, इसलिए मानकों की अनदेखी पर प्रशासन की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
सीएमओ ने स्पष्ट किया कि जिले के सभी निजी चिकित्सालयों में मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुरक्षित और निर्धारित मानकों के अनुरूप उपचार उपलब्ध कराना अनिवार्य है। नियमों की अनदेखी अथवा स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
अब असली सवाल यही है—सात दिन बाद अस्पताल का जवाब क्या सामने आता है और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई कितनी सख्त होती है?
