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रामकोला ब्लाक प्रशासन कटघरे में, सरकारी कागज़ों पर फर्जी हस्ताक्षर उजागर, जालसाजी का बड़ा खेल सामने आया
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जनता दर्शन में फूटा फर्जीवाड़े का बम, सूचना के नाम पर फ्राड, सचिव-लिपिक पर गंभीर सवाल खड़े
कुशीनगर।
जनपद में सरकारी कार्यालयों की फाइलों में चल रहे काग़ज़ी खेल का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला रामकोला विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लाला छपरा से जुड़ा है, जहां ग्राम पंचायत सचिव सुनीता देवी पर फर्जी हस्ताक्षर कर सूचना भेजने, झूठी आख्या प्रस्तुत करने और सुनियोजित तरीके से सरकारी अभिलेखों में हेरफेर करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
यह पूरा प्रकरण जनता दर्शन में दिए गए एक शिकायती प्रार्थना पत्र के बाद उजागर हुआ। शिकायतकर्ता राकेश कुमार श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि उनके नाम से दर्शाई गई सूचना उन्हें कभी प्राप्त ही नहीं हुई, इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में उनके नाम से सूचना प्राप्त दिखाकर मामले को निस्तारित करने का षड्यंत्र रचा गया।
शिकायत के अनुसार, सूचना के अधिकार से जुड़े इस मामले में खंड विकास अधिकारी रामकोला की आख्या एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा जिला विकास अधिकारी को दिए गए स्पष्टीकरण में दावा किया गया कि शिकायतकर्ता को 17 फरवरी 2025 को पंजीकृत डाक से सूचना भेज दी गई थी तथा उसकी प्रति राज्य सूचना आयोग, लखनऊ में भी प्रस्तुत की गई।
लेकिन जब दस्तावेज़ों की बारीकी से जांच हुई तो कहानी में कई चौंकाने वाले विरोधाभास सामने आए। आख्या के साथ संलग्न दस्तावेज़ों के पृष्ठ संख्या तीन पर शिकायतकर्ता के नाम से संबोधित पत्र पर 07 फरवरी 2025 की तारीख में प्राप्ति दर्शाते हुए हस्ताक्षर अंकित पाए गए। हैरानी की बात यह है कि ग्राम पंचायत सचिव स्वयं यह स्वीकार कर चुकी हैं कि यह हस्ताक्षर शिकायतकर्ता के नहीं, बल्कि जन सूचना लिपिक के हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब जन सूचना लिपिक को दस्तावेज़ 18 फरवरी 2025 को प्राप्त कराए गए, तो उससे 11 दिन पहले शिकायतकर्ता के नाम से पत्र पर हस्ताक्षर कैसे दर्ज हो गए? यही तारीखों का विरोधाभास पूरे मामले को संदिग्ध बना रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी दस्तावेज़ी जालसाजी है। उनका आरोप है कि सचिव द्वारा यह स्वीकार करना कि हस्ताक्षर शिकायतकर्ता के नहीं हैं, अपने आप में अपराध की स्वीकारोक्ति है। यह मामला नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें फ्राड, कूटरचना और सरकारी अभिलेखों में जालसाजी जैसे गंभीर अपराध की आशंका प्रबल है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस सनसनीखेज प्रकरण में दोषियों पर कब और क्या कार्रवाई होती है।
फर्जी हस्ताक्षर और झूठी आख्या से जुड़े सनसनीखेज प्रकरण में शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से दो टूक कार्रवाई की मांग की है। प्रार्थना पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ग्राम पंचायत सचिव सुनीता देवी द्वारा किया गया कृत्य केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित फ्राड और दस्तावेज़ी जालसाजी की श्रेणी में आता है। शिकायतकर्ता ने सचिव के विरुद्ध तत्काल विभागीय कार्रवाई के साथ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की मांग उठाई है। साथ ही जन सूचना लिपिक को कारण बताओ नोटिस जारी कर लिखित स्पष्टीकरण लेने का भी अनुरोध किया गया है।
यह मामला अब किसी एक व्यक्ति की शिकायत भर नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता और जवाबदेही की कठोर परीक्षा बन चुका है। यदि ऐसे गंभीर आरोपों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह संदेश जाएगा कि सरकारी फाइलों में फर्जी हस्ताक्षरों के सहारे सच को दबाया जा सकता है। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर पर टिकी हैं कि उनका कानूनी डंडा दोषियों पर चलेगा या यह प्रकरण भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
— विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता की रिपोर्ट
