
विलेज फास्ट टाइम्स
कुशीनगर से विशेष संवाददाता
किसके संरक्षण में 15 साल तक नहीं मिला कब्जा? आखिर क्यों भटकता रहा खरीदार, अब प्रशासन ने दिलाया न्याय
दुदही, कुशीनगर। क्या एक वैध खरीदार को अपनी ही खरीदी हुई जमीन पर कब्जा पाने के लिए 15 वर्षों तक इंतजार करना पड़ना चाहिए? क्या राजस्व अभिलेखों में दर्ज अधिकार भी वर्षों तक सिर्फ कागजों में ही सीमित रह जाते हैं? ग्राम कतौरा, तप्पा पृथ्वीपुर स्थित अराजी संख्या-199 का मामला ऐसे ही कई सवाल खड़े करता है, जिनका जवाब आम जनता भी जानना चाहती है।

शनिवार को राजस्व विभाग और बिशुनपुरा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में जब्बार पुत्र अमीन खान, निवासी ग्राम बांसगांव को उनकी खरीदी हुई भूमि पर विधिवत कब्जा दिलाया गया। कार्रवाई नायब तहसीलदार दुदही राजेश कुमार भारती, नायब तहसीलदार तरया शिव शंकर मिश्रा, राजस्व निरीक्षक जाकिर अंसारी, क्षेत्रीय लेखपाल रविशंकर सिंह, दीपू जायसवाल, अच्छेलाल तथा बिशुनपुरा पुलिस टीम की उपस्थिति में शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराई गई।
लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि आज प्रशासन भूमि पर कब्जा दिलाने में सक्षम था, तो यही कार्रवाई 15 वर्ष पहले क्यों नहीं हो सकी? क्या प्रशासनिक प्रक्रिया की सुस्ती इसका कारण थी? क्या लगातार लंबित रहने से विवाद और जटिल होता गया? या फिर अन्य प्रशासनिक कारणों से कार्रवाई में विलंब हुआ? इन प्रश्नों पर संबंधित विभाग ही स्पष्ट स्थिति बता सकता है।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि भूमि विवादों में समय पर कार्रवाई न होने से सबसे अधिक नुकसान उस व्यक्ति को होता है जिसने कानून के दायरे में रहकर जमीन खरीदी होती है। वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर, आर्थिक नुकसान, मानसिक तनाव और न्याय की प्रतीक्षा आम नागरिक का भरोसा कमजोर करती है।
हालांकि, शनिवार की कार्रवाई ने यह भी साबित कर दिया कि यदि प्रशासन दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कानून के अनुसार कार्य करे तो वर्षों पुराने विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं। मौके पर राजस्व टीम ने अभिलेखों के अनुरूप सीमांकन कराया और पुलिस की मौजूदगी में कब्जा दिलाकर विवाद का पटाक्षेप किया।
यह मामला केवल एक जमीन का नहीं, बल्कि पूरे राजस्व तंत्र के लिए एक संदेश है। यदि लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण हो, तो न केवल अवैध कब्जे की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा, बल्कि अदालतों और तहसीलों में लंबित विवादों की संख्या भी कम होगी।
अब आम जनमानस की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ एक मामले तक सीमित रहेगी, या फिर जनपद में वर्षों से लंबित अन्य भूमि विवादों पर भी इसी प्रकार निष्पक्ष और प्रभावी अभियान चलाया जाएगा। जनता चाहती है कि हर वैध अधिकारधारी को समय पर न्याय मिले और किसी भी नागरिक को अपने ही अधिकार के लिए वर्षों तक भटकना न पड़े।
जनता का संदेश साफ है—कानून का सम्मान तभी बढ़ेगा, जब न्याय समय पर मिलेगा। यदि प्रशासन निष्पक्ष, पारदर्शी और तत्पर रहेगा, तो अवैध कब्जे की प्रवृत्ति स्वतः समाप्त होगी और शासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।

