
“जिन्हें हटाना मुश्किल माना जाता था, वे भी बदले गए” — कसया से राधेश्याम सिंह की विदाई, पूरे राजस्व महकमे में हड़कंप
विलेज फास्ट टाइम्स | कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर के राजस्व विभाग में शनिवार का दिन वर्षों तक याद रखा जाएगा। एक ही आदेश में 63 लेखपालों के तबादले ने पूरे प्रशासनिक ढांचे में हलचल मचा दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर जारी स्थानांतरण सूची ने उन चेहरों तक को नई तैनाती के लिए मजबूर कर दिया, जिन्हें वर्षों से एक ही तहसील में मजबूत पकड़ रखने वाला माना जाता था। तहसीलों से लेकर कलेक्ट्रेट तक पूरे दिन सिर्फ एक ही चर्चा रही—”इस बार डीएम ने किसी की नहीं सुनी।”प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को केवल सामान्य तबादला नहीं, बल्कि राजस्व व्यवस्था में निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रशासनिक अनुशासन स्थापित करने की बड़ी पहल माना जा रहा है। पडरौना, कसया, हाटा, खड्डा, तमकुहीराज और कप्तानगंज तहसीलों में व्यापक फेरबदल करते हुए कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सभी स्थानांतरित लेखपाल तत्काल कार्यमुक्त होकर नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करेंगे तथा उनका वेतन भी वहीं से आहरित होगा।

वर्षों पुरानी जड़ें हिलीं, बदले प्रशासनिक समीकरण
राजस्व विभाग में लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि कुछ कर्मचारी वर्षों तक एक ही तहसील में बने रहते हैं। समय के साथ स्थानीय पहचान, प्रभाव और कार्यशैली का ऐसा तंत्र विकसित हो जाता है, जिसे बदलना आसान नहीं माना जाता। लेकिन इस बार जिलाधिकारी ने ऐसे सभी समीकरणों पर एक साथ प्रहार करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि प्रशासनिक व्यवस्था में गतिशीलता और निष्पक्षता सर्वोपरि है।
सूत्रों के अनुसार लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इससे राजस्व कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी और जनता को बेहतर सेवा मिलने की संभावना मजबूत होगी।
सबसे चर्चित नाम बना राधेश्याम सिंह
पूरे तबादला आदेश में सबसे अधिक चर्चा कसया तहसील में लंबे समय से तैनात लेखपाल राधेश्याम सिंह के स्थानांतरण की रही। विभागीय चर्चाओं के अनुसार उनका पूर्व में भी स्थानांतरण हुआ था, लेकिन वे कसया तहसील में ही कार्यरत बने रहे। इस बार उन्हें तमकुहीराज तहसील भेज दिया गया है।
कार्यालयों में दिनभर यही चर्चा रही कि जिन कर्मचारियों को लंबे समय से प्रभावशाली माना जाता था, वे भी इस बार स्थानांतरण सूची से बाहर नहीं रह सके। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक आदेश केवल स्थानांतरण का है और प्रशासन ने इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय बताया है।

छह तहसीलों का पूरा गणित बदला
स्थानांतरण सूची में सबसे अधिक प्रभाव पडरौना, कसया और कप्तानगंज तहसीलों पर दिखाई दिया। कई लेखपालों को पडरौना से खड्डा, कप्तानगंज और तमकुहीराज भेजा गया, जबकि अन्य तहसीलों से भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नई तैनाती की गई। इससे वर्षों से बने स्थानीय कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियों का पूरा स्वरूप बदल गया है।
क्या यह सिर्फ शुरुआत है?
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार स्थानांतरण नीति का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लक्ष्य बनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। विभागीय गलियारों में यह भी चर्चा है कि भविष्य में लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत अन्य कर्मचारियों की भी समीक्षा की जा सकती है।
कार्यालयों में दिनभर गूंजता रहा एक ही सवाल
आदेश जारी होने के बाद राजस्व कार्यालयों में कर्मचारी सूची का मिलान करते दिखाई दिए। कई कर्मचारी नई तैनाती की तैयारी में जुट गए, जबकि कुछ के लिए यह आदेश पूरी तरह अप्रत्याशित रहा। सोशल मीडिया पर भी तबादला सूची तेजी से साझा होती रही और इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती रहीं।
संदेश साफ—सरकारी सेवा में स्थायी ठिकाना नहीं
जिलाधिकारी की इस कार्रवाई ने एक स्पष्ट प्रशासनिक संदेश दिया है कि सरकारी सेवा में किसी भी कर्मचारी की तैनाती स्थायी नहीं हो सकती। शासन की स्थानांतरण नीति का पालन सभी के लिए समान रूप से अनिवार्य है। वर्षों से चली आ रही “यहीं रहेंगे” वाली सोच पर इस आदेश ने निर्णायक विराम लगाने का प्रयास किया है।
अब पूरे जिले की निगाह इस बात पर टिकी है कि नई तैनाती के बाद राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली कितनी बदलती है। लेकिन इतना तय है कि 63 लेखपालों के सामूहिक तबादले ने कुशीनगर के प्रशासनिक इतिहास में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है और यह आदेश आने वाले दिनों तक राजस्व महकमे में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहेगा।
