
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विषेश संवाददाता
स्कूल वैनों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर आखिरकार परिवहन विभाग की “नींद” टूटती दिखाई दे रही है। वर्षों से नियमों को धता बताकर दौड़ रहे मानकहीन वाहनों पर अब विभाग का डंडा चलना शुरू हुआ है। उप परिवहन आयुक्त गोरखपुर मंडल के कुशीनगर एआरटीओ कार्यालय निरीक्षण के बाद पूरे जिले में हड़कंप मच गया है। निरीक्षण में जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने यह साफ कर दिया कि बच्चों की जिंदगी अब तक कितनी बड़ी लापरवाही के हवाले थी।
07 मई को सहायक सम्भागीय परिवहन कार्यालय कुशीनगर पहुंचे उप परिवहन आयुक्त ने समीक्षा बैठक में स्कूली वाहनों की स्थिति पर जब नजर डाली तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिले में 203 स्कूली वाहनों के परमिट समाप्त पाए गए। यानी जिन वाहनों में रोज मासूम बच्चे स्कूल पहुंच रहे थे, उनमें से सैकड़ों वाहन बिना वैध अनुमति के सड़कों पर फर्राटा भर रहे थे। सवाल यह उठता है कि आखिर अब तक विभाग की नजर इन पर क्यों नहीं पड़ी? क्या बच्चों की सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित थी?
उप परिवहन आयुक्त ने साफ शब्दों में निर्देश दिया कि बिना परमिट चल रहे वाहनों को तत्काल परमिट से आच्छादित कराया जाए, अन्यथा ऐसे वाहनों को सीधे निरुद्ध किया जाए। विभाग की इस चेतावनी के बाद स्कूल संचालकों और वाहन मालिकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
मामला यहीं खत्म नहीं होता। जिले में 168 स्कूली वाहनों की फिटनेस और पीयूसी भी समाप्त पाई गई। यानी जिन वाहनों को बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया, वे खुद “बीमार” निकले। फिटनेस खत्म, प्रदूषण प्रमाणपत्र गायब और तकनीकी कमियां अलग। अब संबंधित विद्यालयों को नोटिस जारी किए गए हैं।
UPISVMP पोर्टल पर जनपद के 1672 वाहन पंजीकृत बताए गए, लेकिन इनमें से 250 वाहनों को विद्यालय प्रबंधन ने अब तक ऑनबोर्ड तक नहीं कराया। यह लापरवाही नहीं बल्कि सीधे-सीधे नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा मामला माना जा रहा है। शासन ने 15 मई 2026 तक सभी कमियां दूर करने की अंतिम समय-सीमा तय की है।
सहायक सम्भागीय परिवहन अधिकारी मो० अजीम ने बताया कि ब्लॉकवार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर बड़े स्तर पर वाहनों का निरीक्षण कराया गया। अब तक 1316 वाहनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 681 वाहनों में गंभीर कमियां मिलीं। इनमें परमिट, फिटनेस, तकनीकी गड़बड़ी और दस्तावेजी खामियां शामिल हैं। संबंधित विद्यालय प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को डाक, ई-मेल और व्हाट्सएप के माध्यम से नोटिस भेजे गए हैं। यदि निर्धारित समय में सुधार नहीं हुआ तो विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
निरीक्षण के दौरान कार्यालय के विभिन्न पटलों की भी जांच की गई। सभी कर्मचारी उपस्थित मिले और कार्यालय परिसर में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं पाया गया। हालांकि जनता के बीच यह चर्चा जरूर रही कि अगर ऐसी मुस्तैदी पहले दिखाई जाती तो इतने बड़े स्तर पर नियमों की अनदेखी शायद सामने ही नहीं आती।
उधर परिवहन विभाग ने ओवरलोड बालू माफियाओं पर भी शिकंजा कसते हुए एनएच-28 फोरलेन, फाजिलनगर और पटेहरवा रोड पर अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान 06 ओवरलोड बालू लदे वाहनों को पकड़कर कसया थाना में निरुद्ध किया गया। इन वाहनों पर 2.50 लाख रुपये का प्रशमन शुल्क लगाया गया, जिसमें से 1.50 लाख रुपये की वसूली भी हो चुकी है।
अब सवाल यही है कि क्या यह सख्ती सिर्फ निरीक्षण तक सीमित रहेगी, या फिर वास्तव में बच्चों की सुरक्षा और ओवरलोड माफियाओं पर स्थायी लगाम लग पाएगी। फिलहाल परिवहन विभाग की इस कार्रवाई ने जिले भर में हलचल जरूर मचा दी है।
