
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के पड़रौना रेंज अंतर्गत ग्राम कंठी छपरा और पुर्नहा मिश्र टोला में उस समय दहशत का माहौल पैदा हो गया, जब आधी रात गांव के बीचों-बीच खूंखार तेंदुए की मौजूदगी की खबर आग की तरह फैल गई। रात करीब 12:50 बजे ग्रामीणों ने खेतों और बस्तियों के आसपास तेंदुए को घूमते देखा तो लोगों की सांसें थम गईं। महिलाएं बच्चों को घरों में बंद करने लगीं, तो गांव के रास्ते सुनसान हो गए। हर तरफ सिर्फ एक ही चर्चा थी — “गांव में तेंदुआ घुस आया है!”
सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम बिना समय गंवाए मौके पर पहुंच गई। हालांकि शुरुआती तलाश में तेंदुआ हाथ नहीं आया, लेकिन वन विभाग ने रातभर इलाके में कॉम्बिंग अभियान चलाकर यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासन चाहे तो आपदा को हादसे में बदलने से रोका जा सकता है। टीम ने ग्रामीणों को लगातार सतर्क रहने, भीड़ न लगाने और अफवाहों से बचने की अपील की।
सुबह करीब 6:15 बजे अचानक पुर्नहा मिश्र गांव से सूचना आई कि तेंदुआ एक निर्माणाधीन मकान में छिपा बैठा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम बिजली की रफ्तार से मौके पर पहुंची। इसी दौरान तेंदुआ निर्माणाधीन मकान से निकलकर खड़ंजा मार्ग होते हुए गांव के बाहर एक पुलिया में जाकर बैठ गया। तेंदुए की एक झलक पाने के लिए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हालात ऐसे हो गए कि जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।
लेकिन वन विभाग की टीम ने अद्भुत सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया। विभागीय अधिकारियों ने तेंदुए को उकसाने के बजाय रणनीतिक तरीके से उसे सुरक्षित पकड़ने की योजना बनाई। पिंजरे, जाल और सुरक्षा उपकरणों के साथ वन कर्मियों ने मोर्चा संभाला।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई, जिसके बाद शहीद अशफाक उल्ला खाँ प्राणि उद्यान से डॉ० योगेश प्रताप सिंह (वेट) की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। गांव में घंटों चले हाईवोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार तेंदुए को ट्रैंक्यूलाइज कर सुरक्षित कब्जे में ले लिया गया। जैसे ही तेंदुआ काबू में आया, पूरे गांव ने राहत की सांस ली।
रेस्क्यू के बाद तेंदुए को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए शहीद अशफाक उल्ला खाँ प्राणि उद्यान भेज दिया गया। इस पूरे अभियान में प्रभागीय वनाधिकारी कुशीनगर के निर्देशन में वन विभाग की टीम ने जिस तत्परता और हिम्मत का परिचय दिया, उसकी ग्रामीणों ने खुलकर सराहना की।
हालांकि इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि आखिर जंगलों से निकलकर वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों तक क्यों पहुंच रहे हैं? क्या जंगल सिकुड़ रहे हैं या इंसानी दखल वन्यजीवों के प्राकृतिक रास्तों को खत्म कर रहा है? फिलहाल, कुशीनगर में तेंदुए के इस हाईप्रोफाइल रेस्क्यू ऑपरेशन ने पूरे इलाके में सनसनी जरूर फैला दी है।
