
करोड़ों का मुआवजा, हजारों परिवारों को राहत, अदालत परिसर में दिखा न्याय और समझौते का अनोखा संगम
09 मई, विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर।
कुशीनगर जनपद में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय व्यवस्था के इतिहास में एक विशाल और ऐतिहासिक आयोजन बनकर उभरी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कुशीनगर के तत्वावधान में आयोजित इस राष्ट्रीय लोक अदालत में न्याय का ऐसा “महाकुंभ” देखने को मिला, जहां एक ही दिन में हजारों नहीं बल्कि कुल 1,47,540 वादों का निस्तारण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। अदालत परिसर में सुबह से ही वादकारियों, अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों की भारी भीड़ उमड़ी रही और पूरे दिन न्याय, समझौते व राहत का वातावरण बना रहा।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली तथा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव कुमार त्यागी तथा प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय गुलाब सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया। इस दौरान जिले के तमाम अपर जिला जज, न्यायिक अधिकारी, बार एसोसिएशन पदाधिकारी, अधिवक्ता और सैकड़ों वादकारी मौजूद रहे।
लोक अदालत में फौजदारी, पारिवारिक, बैंक ऋण, मोटर दुर्घटना, राजस्व और अन्य मामलों का तेजी से निस्तारण किया गया। सबसे खास बात यह रही कि वर्षों से लंबित मामलों में भी पक्षकारों ने आपसी सहमति से समझौते किए और न्यायिक प्रक्रिया को सरल व तेज बनाने में सहयोग दिया।
राष्ट्रीय लोक अदालत में 6211 फौजदारी मामलों का निस्तारण करते हुए 75 हजार 770 रुपये जुर्माना वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराया गया। वहीं मोटर दुर्घटना से जुड़े 47 क्लेम मामलों में पीड़ित परिवारों और घायलों को लगभग 3 करोड़ 96 लाख 60 हजार रुपये का मुआवजा दिलाया गया। यह राहत पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी संजीवनी साबित हुई।
बैंक ऋण मामलों में भी लोक अदालत ने बड़ी सफलता हासिल की। प्री-लिटिगेशन स्तर पर 702 बैंक ऋण मामलों का निस्तारण करते हुए बैंकों ने करीब 3 करोड़ 67 लाख रुपये से अधिक की टोकन मनी वसूल की। इसके अलावा 1169 राजस्व मामलों का भी समाधान कराया गया।
पारिवारिक न्यायालयों में भी समझौते और मेल-मिलाप की अनूठी तस्वीर देखने को मिली। प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय द्वारा दो जोड़ों और अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय द्वारा एक जोड़े के पारिवारिक विवाद को समाप्त कर उन्हें माला पहनाकर एक साथ विदा किया गया। यह दृश्य अदालत परिसर में मौजूद लोगों के लिए भावुक और प्रेरणादायक बन गया।
मोटर वाहन दुर्घटना न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी राजेन्द्र सिंह चतुर्थ ने एक महत्वपूर्ण मामले में पीड़ित पक्ष को 9 लाख 70 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश पारित किया। वहीं स्थायी लोक अदालत द्वारा भी एक वाद का सफल निस्तारण किया गया।
राष्ट्रीय लोक अदालत की इस अभूतपूर्व सफलता ने यह साबित कर दिया कि आपसी समझौते और सरल न्याय प्रणाली के जरिए वर्षों पुराने विवादों को भी तेजी से समाप्त किया जा सकता है। कुशीनगर की यह लोक अदालत न केवल न्याय दिलाने का माध्यम बनी, बल्कि हजारों लोगों के चेहरों पर राहत और संतोष की मुस्कान भी छोड़ गई।
