
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | 09 मई 2026
कुशीनगर जनपद के कसया थाना क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। ग्राम गैनपुर तप्पा मैनपुर स्थित पंकज ईंट उद्योग (आरएम मार्का ईंट भट्ठा) पर मजदूरी करने आए छत्तीसगढ़ के श्रमिक परिवारों के तीन मासूम बच्चे पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूब गए। चीख-पुकार और अफरा-तफरी के बीच जब तक ग्रामीण बच्चों को बाहर निकालते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसया पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया।
घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है। मासूमों की मौत से ईंट भट्ठे पर काम कर रहे मजदूर परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। हादसे ने एक बार फिर ईंट भट्ठों और खनन जैसे कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, जहां मौत के गड्ढे खुलेआम लोगों की जिंदगी निगलने को तैयार बैठे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ईंट निर्माण कार्य के लिए भट्ठे के समीप गहरा गड्ढा खोदा गया था, जिसमें बरसात का पानी जमा था। शुक्रवार सुबह बच्चे खेलते-खेलते उसी स्थान के पास पहुंच गए। बताया जा रहा है कि पहले एक बच्चा फिसलकर पानी में गिर गया। उसे बचाने के प्रयास में दो अन्य मासूम भी गड्ढे में समा गए। देखते ही देखते तीनों मासूम पानी में डूब गए और मौके पर चीख-पुकार मच गई।
स्थानीय लोगों ने काफी मशक्कत के बाद बच्चों को बाहर निकाला और तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसया पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
मृत बच्चों की पहचान अनन्या पुत्री लक्षन उम्र लगभग 07 वर्ष, अभय पटेल पुत्र पंचू पटेल उम्र लगभग 03 वर्ष तथा अनुष्का पुत्री सुखेन्द्र उम्र लगभग 02 वर्ष 06 माह निवासी जनपद बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के रूप में हुई है। तीनों मासूम अपने माता-पिता के साथ मजदूरी करने कुशीनगर आए थे।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू की तथा तीनों शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम हेतु मोर्चरी हाउस रविंद्रनगर भेज दिया।
इस दर्दनाक हादसे पर जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने गहरा शोक व्यक्त किया है। जिलाधिकारी ने प्रत्येक मृतक बच्चे के आश्रितों को आपदा राहत मद से 04-04 लाख रुपये की अहैतुक सहायता राशि दिए जाने की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिलाधिकारी के निर्देश पर पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए 05 सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है। समिति में उपजिलाधिकारी कसया को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि क्षेत्राधिकारी कसया, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, श्रम प्रवर्तन अधिकारी तथा खनन अधिकारी को सदस्य नामित किया गया है। जिलाधिकारी ने समिति को तीन कार्यदिवस के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ईंट भट्ठे के पास इतने खतरनाक पानी भरे गड्ढे को बिना सुरक्षा इंतजाम के क्यों छोड़ा गया? क्या मजदूरों और उनके बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे थी? यदि समय रहते सुरक्षा घेरा, चेतावनी बोर्ड या निगरानी की व्यवस्था होती तो शायद तीन मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। मासूम बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर दिया है और प्रशासनिक व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
