

पानी भरे गड्ढे ने निगल लीं तीन मासूम जिंदगियां, चीखों से कांप उठा कुशीनगर
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर जनपद के कसया थाना क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह उस वक्त चीख-पुकार और मातम का ऐसा भयावह मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी का दिल दहला दिया। ग्राम गैनपुर तप्पा मैनपुर स्थित पंकज ईंट उद्योग (आरएम मार्का ईंट) पर बने मौत के गहरे गड्ढे में तीन मासूम बच्चों की जिंदगी हमेशा के लिए दफन हो गई। खेल-खेल में शुरू हुआ यह पल कुछ ही मिनटों में ऐसा दर्दनाक हादसा बन गया, जिसने पूरे इलाके को गम में डुबो दिया।
बताया जा रहा है कि ईंट निर्माण के लिए भट्ठा संचालकों द्वारा मिट्टी की खुदाई कर एक विशाल और गहरा गड्ढा बना दिया गया था। बरसात का पानी भर जाने के बाद यह गड्ढा किसी खामोश मौत के कुंड में बदल चुका था। शुक्रवार सुबह करीब आठ बजे मजदूर परिवारों के बच्चे उसी के आसपास खेल रहे थे। तभी अचानक एक मासूम का पैर फिसला और वह गहरे पानी में समा गया। उसे डूबता देख दूसरा बच्चा बचाने दौड़ा, लेकिन वह भी पानी की गहराई में चला गया। इसी बीच तीसरा मासूम भी दोनों को बचाने की कोशिश में मौत के मुंह में उतर गया। देखते ही देखते तीनों बच्चों की सांसें पानी के भीतर थम गईं।
हादसे की खबर फैलते ही ईंट भट्ठे पर अफरा-तफरी मच गई। मजदूर परिवारों की चीखें सुन आसपास के लोग दौड़ पड़े। काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों ने तीनों बच्चों को बाहर निकाला और आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसया पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। यह सुनते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां-बाप अपने कलेजे के टुकड़ों के शवों से लिपटकर बिलखते रहे और वहां मौजूद हर आंख नम हो गई।
मृत बच्चों की पहचान 7 वर्षीय अनन्या पुत्री लक्षन, 3 वर्षीय अभय पटेल पुत्र पंचू पटेल तथा ढाई वर्षीय अनुष्का पुत्री सुखेंद्र के रूप में हुई है। सभी परिवार मूल रूप से बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के निवासी बताए जा रहे हैं, जो रोजी-रोटी की तलाश में कुशीनगर आकर ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर रहे थे। लेकिन किस्मत ने ऐसा क्रूर खेल खेला कि मजदूरी की मजबूरी तीन मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ गई।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने हादसे पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए प्रत्येक मृतक बच्चे के परिजनों को आपदा राहत मद से चार-चार लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा की। वहीं तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए रविंद्रनगर मोर्चरी भेज दिया गया है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर तीन कार्यदिवस में रिपोर्ट तलब की है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर खुले मौत के गड्ढों के बीच मजदूर परिवारों के बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है? आखिर कब तक लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी मासूम जिंदगियां?
