
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर महाराजगंज से विशेष संवाददाता
महराजगंज। भारत-नेपाल सीमा पर इन दिनों ट्रांसपोर्ट कारोबार मानो “जुर्माने की जंजीरों” में जकड़ गया है। नेपाल सरकार द्वारा नई यातायात व्यवस्था लागू होते ही भारतीय मालवाहक ट्रकों पर ऐसी सख्ती शुरू हुई है कि ट्रांसपोर्ट यूनियनों और ट्रक चालकों में भारी आक्रोश फैल गया है। सोनौली बॉर्डर पर हालात यह हैं कि कई-कई दिनों तक ट्रकों की लंबी कतारें लगी हुई हैं और चालक सड़क किनारे परेशान खड़े रहने को मजबूर हैं। ऊपर से ओवरलोडिंग के नाम पर 10 हजार नेपाली रुपये का भारी-भरकम चालान ट्रक चालकों की कमर तोड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि 28 अप्रैल से नेपाल यातायात पुलिस ने भारत से नेपाल जाने वाले ट्रकों की सघन जांच शुरू कर दी है। नए नियमों के तहत 14 चक्का ट्रक में 25 टन और 12 चक्का ट्रक में 21 टन से अधिक भार मिलने पर सीधा जुर्माना ठोका जा रहा है। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि वर्षों से इन्हीं मानकों पर वाहन चलते रहे, लेकिन अब अचानक ऐसा शिकंजा कसा गया है मानो भारतीय ट्रक ही सारी व्यवस्था बिगाड़ रहे हों।
सोनौली बॉर्डर ट्रक यूनियन के अध्यक्ष पप्पू खान ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पहले ट्रकों को कई दिनों तक सीमा पर रोककर रखा गया, फिर नेपाल में प्रवेश देने के लिए जुर्माना भरने की शर्त थोप दी गई। उनका आरोप है कि कार्रवाई खासतौर पर सोनौली बॉर्डर से गुजरने वाले भारतीय ट्रकों को निशाना बनाकर की जा रही है।
दिल्ली, राजस्थान और पश्चिम बंगाल से आए ट्रक चालकों ने भी दर्द बयां किया। उनका कहना है कि पहले ही 5 से 6 दिनों तक लाइन में खड़े रहने से डीजल, खाना और मजदूरी का खर्च बढ़ जाता है, अब ऊपर से भारी चालान ने ट्रांसपोर्ट कारोबार को घाटे का सौदा बना दिया है।
व्यापारियों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो भारत-नेपाल व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है। वहीं ट्रक यूनियनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि नियमों में राहत नहीं मिली तो सड़क से लेकर सीमा तक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
