
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर। जनपद का तमकुहीराज तहसील क्षेत्र इन दिनों कथित तौर पर फर्जी फर्मों के जरिए संचालित हो रहे एक बड़े जीएसटी खेल को लेकर चर्चा के केंद्र में है। आरोप है कि स्क्रैप कारोबार की आड़ में करोड़ों रुपये के फर्जी लेनदेन दिखाकर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि जिन फर्मों के नाम पर करोड़ों का कारोबार कागजों में दर्शाया गया, उनका जमीन पर कोई वास्तविक अस्तित्व तक नहीं मिला।
सूत्रों के मुताबिक गरीब, मजदूर और अनजान लोगों के आधार कार्ड व पैन कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी तरीके से फर्में खड़ी की गईं। इन दस्तावेजों के सहारे जीएसटी नंबर लेकर कागजी कारोबार शुरू किया गया और फिर स्क्रैप खरीद-बिक्री के नाम पर करोड़ों रुपये का टर्नओवर दिखाया गया। आरोप यह भी है कि इन फर्मों के नाम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का बड़ा खेल खेला गया, जिससे शासन को लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये की चपत लगी हो सकती है।
चर्चा में आई फर्मों में महादेव इंटरप्राइजेज, लक्ष्मी इंटरप्राइजेज और गोदावरी इंटरप्राइजेज के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इन फर्मों के नाम पर न कोई स्थायी कार्यालय मिला, न गोदाम और न ही वास्तविक व्यापारिक गतिविधियां दिखाई दीं। इसके बावजूद कागजों में भारी लेनदेन दर्ज होना कई सवाल खड़े कर रहा है।
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड झारखंड का रहने वाला एक व्यक्ति है, जो फिलहाल फरार बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि बिहार सीमा से सटे क्षेत्रों से बैठकर पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था। मामले में कई बिचौलियों और स्थानीय सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना भौतिक सत्यापन के फर्मों को जीएसटी पंजीकरण कैसे मिल गया? यदि समय रहते जांच एजेंसियां सक्रिय नहीं हुईं तो यह फर्जीवाड़ा और बड़ा रूप ले सकता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस तरह के फर्जी कारोबार से ईमानदार व्यापारियों की साख भी प्रभावित हो रही है।
हालांकि पूरे मामले की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से फर्जी फर्मों और संदिग्ध ट्रांजैक्शनों की चर्चाएं सामने आ रही हैं, उससे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। अब लोगों की निगाहें संभावित जांच, भौतिक सत्यापन और विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि निष्पक्ष जांच हुई तो तमकुहीराज से लेकर बिहार-झारखंड तक फैले एक बड़े स्क्रैप और जीएसटी सिंडिकेट का खुलासा हो सकता है।
