
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर | विशेष संवाददाता | 20 मई
कसया तहसील के दिलीपनगर स्थित प्रसिद्ध माँ भगवती कुरुकुल्ला धाम के समीप बहने वाली हिरण्यवती नदी को लेकर वर्षों से उठते सवालों के बीच अब गांव, समाज और प्रशासन एक साथ मैदान में उतरते दिखाई दे रहे हैं। कभी आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य की पहचान रही हिरण्यवती नदी आज गंदगी, अतिक्रमण और उपेक्षा की मार झेल रही है, लेकिन अब इसे पुनर्जीवित करने की मुहिम ने जोर पकड़ लिया है। मंगलवार को जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर स्वयं मौके पर पहुंचे और श्रमदान कर रहे ग्रामीणों, युवाओं और सामाजिक संगठनों के प्रयासों का निरीक्षण किया।
“स्वच्छ नदी, हरित धाम — सामूहिक प्रयास” के संकल्प के साथ चल रहे इस अभियान ने प्रशासनिक तंत्र को भी झकझोर दिया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन नदियों को बचाने की जिम्मेदारी वर्षों से सरकारी विभागों की थी, आखिर उन्हें बचाने के लिए अब जनता को फावड़ा और टोकरी क्यों उठानी पड़ रही है? हालांकि इस जनजागरण ने एक सकारात्मक संदेश जरूर दिया है कि यदि समाज जाग जाए तो सूखी संवेदनाएं भी फिर से बहने लगती हैं।
“श्री कुरुकुल्ला शक्तिपीठ पुनरुत्थान न्यास” के तत्वावधान में गठित “टीम अविरल प्रवाह” द्वारा शुरू किए गए इस सफाई अभियान में ग्रामीणों और युवाओं का उत्साह देखने लायक रहा। नदी की सफाई, जलधारा को अविरल बनाने और आसपास के क्षेत्र को हरित बनाने के लिए लोग घंटों श्रमदान करते दिखे। अभियान में शामिल लोगों ने कहा कि यह सिर्फ नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य है।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने कहा कि नदियां केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की जीवनरेखा हैं। उन्होंने ग्रामीणों और युवाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिरण्यवती को स्वच्छ और निर्मल बनाने की यह पहल पूरे जिले के लिए प्रेरणा बनेगी। जिलाधिकारी ने डीसी मनरेगा, तहसील प्रशासन और जिला पंचायत राज विभाग को अभियान में हरसंभव सहयोग देने के निर्देश दिए। साथ ही पर्यटन विभाग से विकास कार्य कराने और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए नदी पर पुल निर्माण को भी कार्ययोजना में शामिल करने की बात कही।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना था कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी इसी तरह बनी रही तो वह दिन दूर नहीं जब हिरण्यवती नदी फिर से अपने प्राचीन स्वरूप में कल-कल बहती नजर आएगी। फिलहाल सवाल यही है — क्या यह अभियान सिर्फ फोटो और निरीक्षण तक सीमित रहेगा, या सच में हिरण्यवती को नया जीवन मिलेगा?
