
स्वच्छ पेयजल के दावों की खुली पोल, काली मंदिर में पूजा करने वालों को भी नहीं मिलता एक लोटा पानी
विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
पडरौना, कुशीनगर। केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन विकास खंड पडरौना अंतर्गत ग्राम पंचायत रहसू-खुदरा के राजस्व ग्राम खुदरा की तस्वीर इन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यहां सरकारी हैंडपंप वर्षों से खराब पड़े हैं और जलापूर्ति योजना केवल कागजों व भाषणों तक सीमित होकर रह गई है। गांव की हालत ऐसी है कि लोगों को पूजा-पाठ के लिए भी एक लोटा साफ पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव में कई वर्ष पहले पानी की टंकी निर्माण और पाइप लाइन बिछाने का कार्य शुरू कराया गया था। घर-घर टोटियां भी लगाई गईं, लेकिन आज तक किसी भी टोटी से पानी की एक बूंद तक नहीं निकली। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। गांव में लगे अधिकांश सरकारी हैंडपंप या तो पूरी तरह जवाब दे चुके हैं या फिर उनसे निकलने वाला पानी इतना दूषित था कि लोग उसका उपयोग करने से कतराते थे।
गांव स्थित प्राचीन काली मंदिर, जो क्षेत्र के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वहां भी पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त पड़ी है। मंदिर परिसर में लगा सरकारी हैंडपंप लंबे समय से खराब है। ग्रामीणों का कहना है कि हैंडपंप को काफी देर तक चलाने पर भी पानी नहीं निकलता। वहीं बगल में लगी पानी की टोटी भी वर्षों से केवल दिखावा बनकर खड़ी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों और संबंधित विभागीय अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन किसी ने समस्या के समाधान की गंभीर कोशिश नहीं की। इससे लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर नहीं पहुंच रहा और जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मंदिर जैसे सार्वजनिक स्थल पर भी पानी की समुचित व्यवस्था नहीं हो पा रही, तो आम ग्रामीणों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो गए हैं। महिलाएं और बुजुर्ग दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं।
ग्रामीण नर्वदेश्वर मिश्रा, सागर मिश्रा, सत्य प्रकाश मिश्रा सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से तत्काल खराब पड़े हैंडपंपों की मरम्मत कराने, बंद पड़ी पेयजल योजना को चालू करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
