

विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से विशेष संवाददाता
कुशीनगर,। सरकार गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लाख दावे करे, लेकिन दुदही विकास खंड के ग्राम सभा बतरौली धुरखंडवा की तस्वीर उन दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। यहां की सड़कें विकास नहीं, बल्कि उपेक्षा, लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार की दर्दनाक कहानी बयान कर रही हैं। हल्की बारिश ने ही गांव की मुख्य सड़क को कीचड़ और जलभराव के दलदल में बदल दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, भरा पानी और घुटनों तक कीचड़ ने आवागमन को दुश्वार बना दिया है। हालत यह है कि पैदल चलना तक चुनौती बन गया है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को रोजाना जान जोखिम में डालकर गुजरना पड़ रहा है। यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे अस्पताल पहुंचाना किसी परीक्षा से कम नहीं।
ग्रामीणों ने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि गांव में विकास कार्य सिर्फ फाइलों और कागजों में दिखाई देते हैं, जबकि धरातल पर हालात बद से बदतर हैं। लोगों का कहना है कि जनता वोट देकर जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी सौंपती है, लेकिन बदले में उसे टूटी सड़कें, कीचड़ और परेशानियां मिलती हैं। आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर पर विकास निधियों के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम सभा में हुए विकास कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, खर्च हुए सरकारी धन का सत्यापन कराया जाए और यदि अनियमितता सामने आए तो जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि “जब बारिश की कुछ बूंदें ही सड़क की असलियत उजागर कर दें, तब करोड़ों के विकास दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?” अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस बदहाल सड़क को देखकर भी आंखें मूंदे रहेंगे, या फिर गांव को कीचड़ से निकालने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा?
फिलहाल बतरौली धुरखंडवा की सड़क मानो तंज कस रही है—“कागजों में विकास दौड़ रहा है, लेकिन गांव आज भी कीचड़ में फंसा हुआ है।”
