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विलेज फास्ट टाइम्स कुशीनगर से अमित कुमार कुशवाहा विशेष संवाददाता
कुशीनगर। तमकुहीराज क्षेत्र स्थित सलेमगढ़ टोल प्लाजा पर देर रात एक बड़ा मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई। बिहार की सीमा से नेशनल हाईवे के रास्ते उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर रहे दो भारी ट्रेलर वाहनों को स्थानीय ग्रामीणों ने संदिग्ध परिस्थितियों में रोककर ऐसा खुलासा किया, जिसने परिवहन व्यवस्था, टोल संचालन और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों ट्रेलर वाहनों पर भारी मात्रा में स्पंज आयरन लदा हुआ था और आरोप है कि वाहन निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। मौके पर मौजूद जागरूक ग्रामीणों को वाहनों की स्थिति संदिग्ध लगी, जिसके बाद उन्होंने विरोध दर्ज करते हुए दोनों ट्रकों को घेर लिया और वजन जांच की मांग पर अड़ गए।
ग्रामीणों के दबाव के बाद जब वाहनों की तौल कराई गई तो परिणाम चौंकाने वाले बताए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार जिन ट्रेलरों की स्वीकृत भार क्षमता लगभग 55 टन मानी जाती है, उनमें निर्धारित सीमा से कहीं अधिक, करीब 95 टन तक माल लदा मिला। यह जानकारी सामने आते ही मौके पर मौजूद लोगों में नाराजगी बढ़ गई और ओवरलोडिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग तेज हो गई।
मामले की सूचना मिलते ही तहसील प्रशासन, स्थानीय पुलिस और संबंधित विभागों की टीम मौके पर पहुंची। प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्काल जांच शुरू करते हुए वाहन चालकों से परिवहन, बिल्टी और माल से जुड़े आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन प्रारंभिक जांच में चालक संतोषजनक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद प्रशासन ने दोनों वाहनों को कब्जे में लेते हुए तमकुहीराज थाने भेज दिया, जहां विधिक और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में माल लेकर चल रहे वाहन बिना पर्याप्त जांच के कैसे हाईवे पर संचालित हो रहे थे। लोगों ने टोल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं व्यापारिक परिवहन में दस्तावेजी व्यवस्था और कर संबंधी अनुपालन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि ओवरलोड वाहन केवल सरकारी सड़कों को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि जानलेवा हादसों की आशंका भी कई गुना बढ़ा देते हैं। ऐसे में यह कार्रवाई प्रशासन के लिए केवल दो ट्रकों तक सीमित मामला नहीं, बल्कि पूरे ओवरलोड नेटवर्क और निगरानी व्यवस्था की परीक्षा बन चुकी है।
